क्योंकि चुनाव आने में अभी थोड़ा समय है और बलात्कारी जब अपने ही जात-बिरादरी के हों, तो उनके बारे में लिखने पर क्या पता नरक-वरक जाना पड़ जाए, या कोई पूछ ले कि क्या इसी दिन के लिए अवार्ड दिया था? क्या इसी दिन के लिए तुम्हें भीड़ दे कर खड़ा किया था, तुम्हें नेता बनाया था?
पाकिस्तान की जनता में बढ़ते महँगाई को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। जनता बेसिक सुविधाओं के लिए मुँहताज हो रही है और इमरान खान अभी भी इस समस्या से न निपटकर भारत के आतंरिक मामले कश्मीर में दखल के लिए दूसरे देशों से समर्थन न दिए जाने के बावजूद भी चक्कर लगा रहे हैं।
दलित नाबालिग लड़की की चीख-पुकार सुनकर खेतों में काम कर रहे लोग घटनास्थल पर पहुँचे और नाजिक को पकड़ लिया। उसकी जमकर पिटाई की। लेकिन आदिल के साथ एक और अज्ञात युवक मौक़े से भागने में क़ामयाब रहे।
"अगर विवादित स्थल पर इतिहास में कोई मंदिर था तो वह कब गायब हो गया होगा, किसी को नहीं पता। यह ढाँचा 19वीं सदी तक भारत के किसी अन्य सामान्य मस्जिद की तरह ही था, विवाद के बाद यह चर्चित हो गया।"
मुस्लिम पक्षकार ने दावा किया कि जन्मस्थान अयोध्या में ही है लेकिन विवादित स्थल पर नहीं है, कहीं और है। इससे पहले मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि पूरे अयोध्या को ही जन्मस्थान माना जाता है और इसके बारे में कोई सटीक स्थान का जिक्र नहीं है।
अपने माता-पिता के साथ इसी साल 14 मई को पाकिस्तान से आए तीन बच्चों के भविष्य पर मॅंडरा रहा संकट। दिल्ली के एक सरकारी स्कूल ने 5 जुलाई को उन्हें एडमिशन दिया। 8 जुलाई से क्लास अटेंड करने की इजाजत भी मिली। लेकिन, 14 सितंबर को स्कूल से यह कह कर निकाल दिया गया कि उनकी उम्र ज्यादा है।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अनुसार ईसाई लड़कियाँ 'लव जिहाद' का सबसे आसान शिकार बन रही हैं। केरल की हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए एनआईए से जाँच की मॉंग की गई है। केरल बिशप कैथोलिक कॉन्फ्रेंस की रिपोर्ट के अनुसार 4000 ईसाई लड़कियों को प्यार के जाल में फँसाया गया और जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया।
फुल्का ने अपनी पुस्तक में रकाबगंज गुरुद्वारा पर हमले का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि भीड़ ने गुरुद्वारा को नुक़सान पहुँचाया और 2 सिखों को ज़िंदा जला डाला। हत्यारे 5 घंटे तक उत्पात मचाते रहे और आरोप है कि कमलनाथ पूरे 2 घंटे तक भीड़ के साथ रहे।
मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पंजाब में कॉन्ग्रेस की कर्जमाफी योजना फ्लॉप हो गई है। किसान आत्महत्या कर रहे हैं और विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। इन सबके बावजूद मीडिया इन ख़बरों को तवज्जो नहीं दे रहा। जबकि, यूपी में छोटी-मोटी गड़बड़ियों को भी हाइलाइट किया गया।
चाहे वो मोदी हों, मर्कल हों, मैक्राँ हों, जॉनसन हो या कोई वैसा राष्ट्र जो यह नहीं चाहता कि उसके किसी एयरपोर्ट पर, चर्च में, सड़क पर, पार्क में, मंदिर पर या बस-ट्रेन में बम फूटे, छुरा चले, ट्रकों से लोगों को रौंदा जाए, तो सबसे पहला काम तो वो यह करें कि एक स्वर में इस मुसीबत को उसके पूरे नाम से स्वीकारें कि हाँ, कट्टरपंथी आतंकवाद ने इन सारे देशों में दहशत फैलाई है, जानें ली है, परिवारों को तोड़ा है।