'स्क्रॉल' को आपातकाल वाली फैंटसी पूरी करनी है। उसका सपना है कि काश कोई इंदिरा आज आपातकाल लगा कर उसे झुकने को कहे और वह रेंगने लगे। अंडमान-निकोबार से आँकड़े निकाल कर यह साबित किया जा रहा है कि आपातकाल से पूरा देश ख़ुश था।
कुछ दिनों पहले ही सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस के टी थॉमस आरएसएस को आपातकाल से मुक्त कराने वाला बता चुके हैं। संघ के तृतीय वर्ष शिविर में उन्होंने कहा- "अगर किसी संगठन को आपातकाल से देश को मुक्त कराने के लिए क्रेडिट दिया जाना चाहिए, तो मैं आरएसएस को दूंगा।”
नए संशोधन के बाद एनआईए को किसी भी राज्य में सर्च के लिए वहाँ के शीर्ष पुलिस अधिकारी की अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। हालाँकि, अभी भी एनआईए को ऐसी कार्रवाई के लिए अनुमति की ज़रूरत नहीं पड़ती लेकिन क़ानून व्यवस्था ख़राब होने की स्थिति में ऐसा करना होता है।
"हाँ, हम छोटे हो सकते हैं, लेकिन झूठे या नकली नहीं। छल हमारी संस्कृति नहीं है। हम रोज़ चुनौतियाँ देते हैं।"- अंसिफ अशरफ़ (प्रबंध सम्पादक, ब्रिटिश हेराल्ड)
अगर मारे गए किसी "समुदाय विशेष" के परिवार को मिले सरकारी मुआवजे को देखें और उसकी तुलना भीड़ द्वारा मार दिए गए डॉ नारंग, रिक्शाचालक रविन्द्र जैसी दिल्ली में हुई घटनाओं से करें तो ये अंतर खुलकर सामने आ जाता है।
अधीर रंजन चौधरी अपनी बात रखते हुए भाषा पर नियंत्रण नहीं रख पाए। इस दौरान उन्होंने असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने इंदिरा गाँधी की तुलना माँ से किया तो वहीं पीएम मोदी के लिए गंदी नाली शब्द का इस्तेमाल किया।
अजय कुमार लल्लू को उत्तर प्रदेश (पश्चिमी) के संगठन में बदलाव करने के लिए पार्टी द्वारा अधिकृत किया गया है। लल्लू कुशीनगर के अंतर्गत आने वाले तमकुही राज विधानसभ क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और लगातार दूसरी बार जीत कर विधायक बने हैं।
"मेरी नजर में अखिलेश यादव की कोई अहमियत नहीं रह गई है। राम गोविंद चौधरी ने सपा के वोट भाजपा को ट्रांसफर करवा दिए लेकिन फिर भी अखिलेश ने उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को British Herald द्वारा 'World’s Most Powerful Person' घोषित करने से जिनके (दिलों में आग) सुलगनी थी, वह सुलगी। और वे ज़हर उगले बिना रह नहीं पाए। पत्रकारिता के स्तर को गिराते हुए यह मीडिया गिरोह अब विकिपीडिया को 'भरोसेमंद सूत्र' मानने लगे हैं।
कराची में जिस आखिरी लोकेशन से पीएनएस साद गायब हुआ था, वहाँ से उसे गुजरात के तटीय स्थल तक पहुँचने में 3 दिन लगते और अगर वो मुंबई स्थित वेस्टर्न फ्लीट के मुख्यालय तक पहुँचने की चेष्टा करता तो उसे 5 दिन लगते। अगर सच में ऐसा होता तो यह देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा हो सकता था।