गौतम का कहना है, “2020 में जो हुआ, वो हम भूल नहीं सकते। अगर मस्जिद दो गुनी बड़ी हो गई तो सोचो, कितने लोग यहाँ जमा होंगे। ये हमारे लिए खतरे की घंटी है।”
13 जुलाई 1931 की जिस घटना को 'इस्लामी विद्रोह' बताया जाता है, असल में वह हिंदुओं के विरुद्ध मजहबी घृणा से उपजी थी। अब जिहादियों को 'शहीद' बता छुट्टी की माँग हो रही है।