Homeविविध विषयभारत की बातसिर्फ एक तीर का निशान और 10000 km दूर अंटार्कटिका के भूगोल की सारी...

सिर्फ एक तीर का निशान और 10000 km दूर अंटार्कटिका के भूगोल की सारी जानकारी: जानिए सोमनाथ मंदिर में स्थापित ‘बाण स्तंभ’ का रहस्य

स्तंभ के निचले भाग पर संस्कृत में अंकित एक शिलालेख लिखा है, “आसमुद्रान्त दक्षिण ध्रुव पर्यंत अबाधित ज्योतिर्मार्ग” यानी  इस स्थान से लेकर दक्षिण ध्रुव (अंटार्कटिका) तक कोई पर्वत या भूमि अवरोध नहीं है। यह कथन एक सत्यापित भौगोलिक तथ्य है।

भारत की पश्चिमी तटरेखा पर अरब सागर के किनारे स्थित सोमनाथ मंदिर प्राचीन हिंदू सभ्यता की गौरवशाली विरासत, अदम्य साहस और पुनर्जागरण का जीवंत प्रतीक है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है।

सदियों से यह केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टि और सनातन परंपरा की अविचल शक्ति का साक्षी रहा है। इसी मंदिर परिसर में स्थित एक रहस्यमयी स्तंभ, बाण स्तंभ आज भी श्रद्धालुओं और इतिहासकारों के लिए जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है।

बाण स्तंभ: जहाँ आध्यात्म और विज्ञान का अद्भुत संगम

सोमनाथ मंदिर के दक्षिण दिशा में, समुद्र की ओर मुख किए खड़ा बाण स्तंभ प्राचीन भारत के वैज्ञानिक और भौगोलिक ज्ञान का अनोखा प्रमाण है। इस स्तंभ के शीर्ष पर एक गोलाकार संरचना है, जिसके आर-पार एक बाण (तीर) अंकित है, जो ठीक दक्षिण दिशा की ओर संकेत करता है।

‘भारत की समुद्री विरासत’ नामक पुस्तक का भाग

स्तंभ के निचले भाग पर संस्कृत में अंकित एक शिलालेख लिखा है, “आसमुद्रान्त दक्षिण ध्रुव पर्यंत अबाधित ज्योतिर्मार्ग” यानी  इस स्थान से लेकर दक्षिण ध्रुव (अंटार्कटिका) तक कोई पर्वत या अवरोधक नहीं है। यह कथन एक भौगोलिक सत्य है।

सोमनाथ तट से लेकर लगभग 10,000 किलोमीटर दूर अंटार्कटिका तक वास्तव में कोई बड़ा स्थलखंड या पर्वत नहीं आता। यह शिलालेख इस बात का प्रमाण है कि छठी शताब्दी के आसपास के भारतवासियों को पृथ्वी की दिशा, समुद्री मार्ग और भूगोल का गहरा ज्ञान था, वह भी उस युग में जब आधुनिक नेविगेशन उपकरणों का अस्तित्व नहीं था।

गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में वेरावल के समीप प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर का उल्लेख शिव पुराण के 14वें अध्याय में मिलता है। यह स्थान कपिला, हिरण और पौराणिक सरस्वती नदियों के संगम के कारण त्रिवेणी संगम के नाम से भी प्रसिद्ध है।

सोमनाथ केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि सनातन धर्म की निरंतरता, विश्वास और सांस्कृतिक आत्मा का केंद्र है। समुद्र की लहरों के बीच खड़ा यह मंदिर सदियों से भारत की आध्यात्मिक चेतना का मार्गदर्शन करता आया है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: 1000 वर्षों की संघर्षगाथा

जनवरी 2026 सोमनाथ मंदिर के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस वर्ष आक्रांता महमूद गजनवी द्वारा वर्ष 1026 में किए गए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसके बाद मंदिर पर कई बार आक्रमण हुए, इस्लामी आक्रांताओं द्वारा इसे ध्वस्त किया गया, लेकिन हर बार सोमनाथ अपने खंडहरों पर फिर से उठ खड़ा हुआ।

आजादी के बाद भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल, प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद और केएम मुंशी जैसे दूरदर्शी नेताओं के प्रयासों से मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और 11 मई 1951 को इसे वर्तमान स्वरूप में राष्ट्र को समर्पित किया गया।

सोमनाथ की इसी हजार वर्षीय संघर्ष और पुनरुत्थान की यात्रा को स्मरण करते हुए सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है। 5 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर एक विस्तृत लेख साझा किया, जिसमें उन्होंने सोमनाथ को भारत की आत्मा, स्वाभिमान और सनातन परंपरा की अमर पहचान बताया।

सोमनाथ मंदिर आज भी यह संदेश देता है कि आक्रमण हो सकते हैं, संरचनाएँ गिर सकती हैं, लेकिन भारत की आस्था, संस्कृति और चेतना को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।

संभल की डेमोग्राफी: हिंदू 13 हजार से हुए 47 हजार, मुस्लिम 23 हजार से हो गए 1 लाख 71 हजार – मुस्लिम भीड़ की...

2011 की जनगणना के अनुसार संभल शहर की डेमोग्राफी 77.67% मुस्लिम आबादी जबकि हिंदू आबादी सिर्फ 22% वाली बताई गई है। वर्तमान में मुस्लिम 80% तक।
- विज्ञापन -