भारत की बात

‘सत्ता के लालच से कॉन्ग्रेस का वर्तमान धूमिल’ – बोस, जिन्होंने गाँधी-नेहरू को छोड़ फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की

कॉन्ग्रेसी नेता सत्ता लोलुप हो चुके थे। बोस ने इस कारण त्याग पत्र दे दिया और फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की। 1947 से 4 साल पहले ही देश को आजाद...

जब नेहरू के रुख से 5 दिन में गिरी 67 लाशें: मराठियों को अलग महाराष्ट्र नहीं देना चाहती थी कॉन्ग्रेस

महाराष्ट्र का गठन कैसे हुए और नेहरू का एक्सपेरिमेंट क्यों फेल हुआ? यशवंतराव से लेकर ठाकरे और पवार कैसे उभरे?

जहाँ एक नपुंसक ने मुग़ल शहजादों को औरतों के कपड़े में नचाया: लाल किला की कहानी

लाल किले की नींव अप्रैल 29, 1638 को रखी गई। इसी किले में एक सनकी रोहिल्ला ने मुगलों को औरतों के कपड़े में नचाया।

औरंगज़ेब से हरिद्वार और वाराणसी को बचाया, आज अपने ही देश में मारे जा रहे: दशनामी नागा साधुओं का उपकार भूल गया देश

पालघर में बेरहमी से मौत के हवाले कर दिए गए दोनों ही साधु दशनामी थे। जिन्होंने औरंगज़ेब से ज्ञानवापी की रक्षा की और ब्रिटिश से युद्ध किया, उन्हें ये कैसी कृतज्ञता अर्पित कर रहे हैं हम?

संविधान में राम-कृष्ण को उकेरने वाला वो नायक जिसकी धरोहर ‘सेकुलर’ जमात ने गुपचुप गायब कर दी

क्या आपने नंदलाल बोस का नाम सुना है? संविधान में हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर आज क्यों नहीं दिखती?

‘गायों का चरवाहा’ बना बम क्रांति का जनक, जिसके धमाकों से हिल गए थे अंग्रेज

वे क्रांतिकारियों के बम विशेषज्ञ थे। उनके ही बनाए बम का इस्तेमाल खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने किया था मुजफ्फरपुर में मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड के काफिले पर हमले में किया था। जयंती पर बम क्रांति के जनक उल्लासकार दत्ता को नमन।

गुरु गोविन्द सिंह की वो सभा, जिसमें उन्होंने अपने ही 5 लोगों के शीश माँगे: खालसा और ‘पंज प्यारे’ का इतिहास

सारी सभा में हलचल मच गई। रौद्र रूप धरे गुरु गोविन्द सिंह की इस माँग के बाद जो लोग आए, उन्होंने न सिर्फ़ अपनी बहादुरी से देश को गौरवान्वित किया बल्कि जाति-पाती के बंधनों को तोड़ने में भी अहम भूमिका निभाई। एक व्यक्ति आगे आया। गुरु गोविन्द सिंह उसे तम्बू में ले गए और खचाक...!

‘भय से मुक्त रहें, क्योंकि भय सबसे बड़ा पाप है’: कोरोना से जंग में जरूरी है स्वामी विवेकानंद का ‘प्लेग मैनिफेस्टो’ पढ़ना

स्वामी विवेकानंद ने प्लेग घोषणा पत्र में घर और उसके परिसर, कमरे, कपड़े, बिस्तर, नाली आदि को हमेशा स्वच्छ बनाए रखने की जो बात कही थी वह आज के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।

मौलवियों ने कहा- काफिरों को इस्लाम में बदलो, लेकिन उसके कारण कामयाब न हो पाया मिरखशाह

भगवान झूलेलाल ने अपने चमत्कारिक जन्म और जीवन से सिंधी हिंदुओं के जान की रक्षा की। हिन्दू धर्म को बचाए रखा। मिरखशाह जैसे ना जाने कितने इस्लामिक कट्टरपंथी आए और धर्मांतरण का खूनी खेल खेला। लेकिन भगवान झूलेलाल की वजह से सिंध में एक दौर में ऐसा नहीं हो पाया था।

‘मुस्लिमों में भारतीयता का बहुत अभाव, वो इसका महत्व नहीं समझते’ – शहीद दिवस पर भगत सिंह का ‘कम चर्चा’ वाला वो लेख

"मुस्लिमों में भारतीयता का बहुत अभाव है। इसलिए वे सभी भारतीयता के महत्व को नहीं समझते हैं और अरबी एवं फारसी लिपि को पसंद करते हैं। पूरे भारत की एक भाषा होनी चाहिए और वह भी हिंदी। जिसे वे कभी नहीं समझते हैं, इसलिए वे अपनी उर्दू की प्रशंसा करते रहते हैं और एक तरफ बैठते हैं।"

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