सनातन में ऐसी कहानियों का बहुत गूढ़ अर्थ था। प्रतीक रूप से ऐसा माना जाता है कि प्रह्लाद का अर्थ आनन्द होता है। वैर और उत्पीड़न की प्रतीक होलिका (जलाने की लकड़ी) जलती है और प्रेम तथा उल्लास का प्रतीक प्रह्लाद (आनंद) अक्षुण्ण रहता है।
जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के मुखिया मौलाना फजलुर रहमान की माँग है कि प्रशासन ऐसी रैलियों पर तत्काल रोक लगाए। उनका कहना है कि इस्लाम में महिलाओं को जितने अधिकार दिए गए हैं, उससे आगे नहीं बढ़ना चाहिए। वकील अज़हर सिद्दीकी का कहना है कि ये मार्च पश्चिमी अजेंडा का हिस्सा है।
“इस चरमपंथी समूह के विचारों से डर फैलता है जिससे लोग डरते हैं और घबराते हैं। अगर हम डरते हैं और घबराते हैं, तो वे जीत जाते हैं। हम इस धमकी का जवाब नहीं देंगे।”
यह दुर्गा मंदिर काशी के पुरातन मंदिरों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक जिन दिव्य स्थलों पर देवी माँ साक्षात प्रकट हुईं, वहाँ निर्मित मंदिरों में उनकी प्रतिमा स्थापित नहीं की गई है, ऐसे मंदिरों में चिह्न पूजा का ही विधान है। दुर्गा मंदिर में भी प्रतिमा के स्थान पर देवी माँ के मुखौटे और चरण पादुकाओं का पूजन होता है।
सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन की बात हो, स्वच्छ भारत के जरिए शौचालय मुहैया कराना हो या उज्ज्वला योजना के जरिए करोड़ों परिवार को गैस कनेक्शन देकर स्वास्थ्य की चिंता करना, मोदी सरकार ने महिला हितैषी ऐसे कई कदम उठाए हैं, जिनके दूरगामी परिणाम होंगे।
केविन पीटरसन असम के काजीरंगा नेशनल पार्क भी पहुँचे। वहाँ पर गैंडों की संख्या को देखते हुए उन्होंने इसे 'वन हॉर्न नेशन' कहा। उन्होंने लिखा कि ये भारत अद्भुत है। पीटरसन ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में उन्हें इस देश ने काफ़ी कुछ दिया है।
पूतना और होलिका को खलनायिका से नायिका बनाने की कोशिश बाल-हत्या के महिमामंडन की कोशिश है। उसे ब्राह्मणवाद के विरोध के नाम पर ढका नहीं जा सकता। ब्राह्मण तो वे दधीचि थे, जिन्होंने वृत्रासुर को मारने के लिए अपनी अस्थियाँ दे दीं, वज्र का निर्माण करने वास्ते।
"अगर मैं दिल्ली दंगों में जाऊँगी तो मेरी पहचान हिन्दू बताई जाएगी... क्योंकि मैं हिन्दू हूँ, तो शायद दिल्ली पुलिस मेरे ऊपर शायद उस हक़ से लाठी नहीं मारेगी, जिस बर्बरता और हक़ से उसने एक मुस्लिम पर लाठी चलाई है।"
अंग्रेजों की औपनिवेशिक, विभाजनकारी तथा जनजातीय नीतियों और ईसाई शिक्षा ने यह गढ़ा कि इस क्षेत्र की सभी जनजातियाँ मंगोल हैं, क्रूर, जंगली तथा हिंसक हैं। परन्तु उनमें प्रचलित अनेक रीतियाँ, लोक-मान्यताएँ, जीवन-मूल्य तथा परम्पराएँ शेष भारत की परम्पराओं से लेशमात्र भी अलग नहीं हैं। इसका उल्लेख वेदों से लेकर महाभारत और रामायण तक में...