संस्थान में विषाणु के वास्ते अनुसंधान एवं मेडिकल उपचार विकसित करने में 50 से ज्यादा अनुभवी वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।' नेस जियोना में इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोलोजिकल रिसर्च को इजराइल के रक्षा बल विज्ञान कोर के तहत 1952 में स्थापित किया गया था और बाद में वह असैन्य संगठन बन गया। अखबार के मुताबिक तकनीकी तौर पर यह संस्थान प्रधानमंत्री कार्यालय के निगरानी में है,
इराक मूल के ईरान में रहने वाले इस्लामिक नेता अयातुल्ला सैयद हादी-अल-मुदारिसी ने 28 फरवरी को MEMRI-TV पर दिए एक वीडियो संदेश में चीन पर निशाना साधते हुए कहा था कि- नि:संदेह अल्लाह ने चीन को ये सज़ा दी है चीन के उन कारनामों के लिए, जिसमें वो मुस्लिम औऱ इस्लाम के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं।
इतिहास का यह पन्ना सन् 57 से भी पुराना है। तब सम्पूर्ण भारतवर्ष में मराठा शासन का प्रभाव चरम पर था। मुगलों से अपने तलवे चटवाने वाला एक सिंधिया भी था। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के पूर्वजों की बगावत को कुचलने वाला भी सिंधिया ही था।
1659 में आदिलशाह ने छत्रपति शिवाजी के साम्राज्य को नष्ट करने के लिए 75000 सैनिकों की सेना के साथ अफ़ज़ल खान को भेजा। छत्रपति शिवाजी ने कूटनीतिक तरीके से अफजल खान को मार डाला। फिर उन्होंने आदिलशाही सल्तनत पर बड़े हमले शुरू करने के लिए अपने सैनिकों को संकेत दिया।
छत्रपति शिवाजी ने आधी रात को 300 सैनिकों के साथ हमला किया। उस वक्त लालमहल में शाहिस्ता खान के लिए 1,00,000 सैनिकों की कड़ी सुरक्षा थी। इस हमले से छत्रपति ने दुनिया को कमांडो ऑपरेशन की तकनीक दिखाई।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने काबुल में हुए इस हमले की एक अन्य वीडियो को भी ट्विपर पर शेयर किया है और इस तरह की घटनाओं को शर्मनाक बताया है। उन्होंने इस घटना पर फौरन कार्रवाई के लिए विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर से और काबुल में स्थित भारत की एंबैसी से गुहार लगाई है कि वे इस मामले को अफगानिस्तान सरकार के सामने उठाएँ और वहाँ पर सिखों और हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
ब्रज क्षेत्र में फाल्गुन माह लगते ही होली की शुरूआत हो जाती है, लेकिन इसके सबसे खास बरसाने की लड्डू मार होली और लट्ठ मार होली मानी जाती है। वृंदावन मथुरा और खासकर बरसाना में मनाई जाने वाली लट्ठ मार होली और लड्डू मार होली को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों की भीड़ एकत्र होती है।
रंगों के त्योहार होली की शुरुआत बुंदेलखंड के एरच कस्बे से हुई है, जो झाँसी जिले में पड़ता है। चौंक गए ना? दरअसल यही वो कस्बा है, जो कभी असुरराज हिरण्यकश्यप की राजधानी हुआ करता था।