"हम ऐसी फिल्म बनाना चाहते थे जहॉं आप देखें कि हमारे साथ क्या हुआ और उसके बावजूद हम अपने जीवन में उम्मीद के सहारे खड़े रहे। हम भिखारी नहीं हैं। हमने सरकार के सामने अपने हाथ नहीं फैलाए बल्कि हम अपने पैरों पर खड़े रहे। यह छोटी नहीं, बल्कि बड़ी बात है।"
कई लोग मानते हैं कि 8वीं या 9वीं शताब्दी में माँ सरस्वती को जापान में बेंजाइटन के रूप में पूजा जाने लगा। लेकिन, पाँचवीं-छठी शताब्दी में लिखी गई बौद्ध पुस्तकों में बेंजाइटन का जिक्र है। उनकी प्रतिमाएँ सफ़ेद होती हैं और उनके हाथ में वीणा होता है।
रोहिंग्या संगठन ARSA ईसाइयों को प्रताड़ित कर रहा है। हालिया हमले में 12 रोहिंग्या ईसाई गंभीर रूप से घायल हो गए। कुछ के शरीर पर एसिड फेंक कर हमला किया गया। पीड़ितों में महिलाएँ एवं बच्चे भी शामिल हैं।
पाकिस्तानी अखबार डॉन ने पुलिस अधिकारियों के हवाले से बताया कि 15, 13, 13 और 12 साल की उम्र के चारों लड़कों ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। उन्होंने मंदिर से पैसे चुराने के लिए वारदात को अंजाम दिया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान में निकले रोजगार के एक विज्ञापन का जिक्र किया। इसमें सफाई के कामों के लिए कर्मचारियों की वैकेंसी निकाली गई थी। इस वैकेंसी में सिर्फ गैर-मुस्लिमों को ही पात्र बताया गया था।
".....लगा कि मुझे तो कोई प्रॉब्लम ही नहीं है, दुनिया बदल गई। यहाँ तक कि वहाँ मौजूद सभी नर्सों में मुझे हूरें नजर आने लगी। मैंने डॉक्टर को दोबारा वही टीका लगाने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने मुझे दूसरा पेनकिलर नहीं दिया। यहाँ के डॉक्टर वाकई तारीफ के काबिल हैं।”
"मुस्लिमों को हमेशा काले रंगों में डार्क लाइटिंग के साथ दिखाया गया। जबकि हिंदुओं को रोशनी और रंगीन कपड़ो में। ये बेहद शर्मनाक और खतरनाक है। हम ऐसी फिल्मों के जरिए अपने बच्चों को जाहिल बना रहे हैं।"
इन लोगों ने हाथों में तख्तियाँ और तिरंगा झंडा लिया हुआ था। इन तख्तियों में लिखा था कि भारत के संविधान और 'वन्दे मातरम' का सम्मान करो। इसी रैली में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने वाले फ़ैसले की भी तारीफ की गई। स्कॉटलैंड में खालिस्तानियों के ख़िलाफ़ नारेबाजी हुई।
यूरोपीय संघ की संसद में CAA के खिलाफ प्रस्ताव लाने के पीछे यूके के सांसद शफ्फाक मोहम्मद का दिमाग है, जो कि मूल रूप से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) का रहने वाला है। POK में मीरपुर का निवासी शफ्फाक मोहम्मद 2019 से यूरोपियन पार्लियामेंट का सदस्य है।
"केवल पुरुष ही इस चर्च में प्रवेश कर सकते हैं, महिलाओं को इस चर्च में प्रवेश की अनुमति नहीं है। हम इस निर्णय का सम्मान करते हैं। इसके पीछे आंशिक रूप से इमारतों की रक्षा करना है, साथ ही इस स्थान को पवित्र बनाए रखने के लिए ऐसा किया जाता है।"