इन लोगों ने हाथों में तख्तियाँ और तिरंगा झंडा लिया हुआ था। इन तख्तियों में लिखा था कि भारत के संविधान और 'वन्दे मातरम' का सम्मान करो। इसी रैली में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने वाले फ़ैसले की भी तारीफ की गई। स्कॉटलैंड में खालिस्तानियों के ख़िलाफ़ नारेबाजी हुई।
यूरोपीय संघ की संसद में CAA के खिलाफ प्रस्ताव लाने के पीछे यूके के सांसद शफ्फाक मोहम्मद का दिमाग है, जो कि मूल रूप से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) का रहने वाला है। POK में मीरपुर का निवासी शफ्फाक मोहम्मद 2019 से यूरोपियन पार्लियामेंट का सदस्य है।
"केवल पुरुष ही इस चर्च में प्रवेश कर सकते हैं, महिलाओं को इस चर्च में प्रवेश की अनुमति नहीं है। हम इस निर्णय का सम्मान करते हैं। इसके पीछे आंशिक रूप से इमारतों की रक्षा करना है, साथ ही इस स्थान को पवित्र बनाए रखने के लिए ऐसा किया जाता है।"
"जिस समय मेरी बेटी को किडनैप किया गया, उस वक्त उसकी शादी की रस्में निभाई जा रहीं थी। लेकिन, तभी शाहरूख गुल अपने कुछ साथियों और पुलिसवालों के साथ आया और मेरी बिटिया को उठा कर ले गया.."
सवाल मुस्लिमों की अल्पसंख्यक बने रहने में रूचि को लेकर है। किसी देश में अल्पसंख्यक होना, उस देश की कृपा और मेहरबानी पर आश्रित होने जैसा भाव देता है। बावजूद इसके भारत में अल्पसंख्यक होना एक अवसर माना जाता रहा है। तो क्या अवसरवादिता के लिए...
'केशवानंद भारती बनाम केरल सरकार' वाले ऐतिहासिक केस ने संविधान की मर्यादा को पुनर्स्थापित किया। इसे भारतीय न्यायपालिका का सबसे 'लैंडमार्क फ़ैसला' कहा जाता है। एक ऐसा निर्णय, जिसने लोकतंत्र की मर्यादा और संविधान की अक्षुण्णता को बरक़रार रखा।
19 जनवरी 1990 की भयावह घटनाएँ बस शुरुआत थी। अंतिम प्रहार 26 जनवरी को होना था, जो उस साल जुमे के दिन थी। 10 लाख लोग जुटते। आजादी के नारे लगते। गोलियॉं चलती। तिरंगा जलता और इस्लामिक झंडा लहराता। लेकिन...
पाकिस्तान की रिपोर्टर नायला इनायत ने पाकिस्तान की जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री जरताज गुल का एक वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है। इस वीडियो में ज़रताज गुल पकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की खूबसूरती और उनकी 'किलर स्माइल' का जिक्र करती हुई देखी जा रही हैं।
मद्रास हाईकोर्ट ने रजनीकांत के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं से पूछा कि हाईकोर्ट आने से पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट क्यों नहीं गए? इससे पहले फ़िल्म अभिनेता रजनीकांत ने एक इंटरव्यू में पेरियार को लेकर बयान दिया था, जिसके बाद से वह चर्चा में आ गए।
चाहे कोई भी वर्ग हो वो उनकी किताब की चाहकर भी नकारात्मक आलोचना नहीं कर सकता, क्योंकि उन्होंने अपनी किताब में सिर्फ़ सच्चाई लिखी है। वे कहते हैं कि किताब में मौजूद कहानियों को पाठक अपने से जोड़कर महसूस कर पाएगा और उसे ये भी लगेगा कि अगर वो इन मुद्दों पर लिखता तो वैसा ही लिखता जैसे श्रीमुख ने उन्हें पेश किया।