राहुल रौशन ने यह ट्वीट लेफ्ट लिबरल गिरोह के पत्रकारों पर व्यंगात्मक शैली में किया था। लेकिन अनुराग कश्यप ने मानो तय कर लिया था कि उन्हें जलील होना ही है। इसलिए व्यंग्य को न समझते हुए भी उन्होंने निशाना साधा लेकिन तीर उल्टा...
पाकिस्तान ने कहा है कि वह चीन में फँसे अपने नागरिकों को नहीं निकालेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन में फँसे पाकिस्तानियों में मुख्य रूप से छात्र हैं जो वुहान शहर में फँसे हुए हैं। वुहान चीन का वह शहर है जहाँ से यह महामारी चीन के बाकी हिस्सों समेत दुनियाभर के शहरों में पहुँची है।
खुद को कनेरिया की गेंदबाजी का प्रशंसक बताने वाली यह महिला है आमना गुल। उसने ट्वीट कर ने कनेरिया से कहा, "आप प्लीज इस्लाम कबूल कर लीजिए। इस्लाम सोना है। इस्लाम के बगैर कुछ भी नहीं है। आप की जिंदगी मौत की तरह है। आप इस्लाम कबूल कर लीजिए।"
"हम ऐसी फिल्म बनाना चाहते थे जहॉं आप देखें कि हमारे साथ क्या हुआ और उसके बावजूद हम अपने जीवन में उम्मीद के सहारे खड़े रहे। हम भिखारी नहीं हैं। हमने सरकार के सामने अपने हाथ नहीं फैलाए बल्कि हम अपने पैरों पर खड़े रहे। यह छोटी नहीं, बल्कि बड़ी बात है।"
कई लोग मानते हैं कि 8वीं या 9वीं शताब्दी में माँ सरस्वती को जापान में बेंजाइटन के रूप में पूजा जाने लगा। लेकिन, पाँचवीं-छठी शताब्दी में लिखी गई बौद्ध पुस्तकों में बेंजाइटन का जिक्र है। उनकी प्रतिमाएँ सफ़ेद होती हैं और उनके हाथ में वीणा होता है।
रोहिंग्या संगठन ARSA ईसाइयों को प्रताड़ित कर रहा है। हालिया हमले में 12 रोहिंग्या ईसाई गंभीर रूप से घायल हो गए। कुछ के शरीर पर एसिड फेंक कर हमला किया गया। पीड़ितों में महिलाएँ एवं बच्चे भी शामिल हैं।
पाकिस्तानी अखबार डॉन ने पुलिस अधिकारियों के हवाले से बताया कि 15, 13, 13 और 12 साल की उम्र के चारों लड़कों ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। उन्होंने मंदिर से पैसे चुराने के लिए वारदात को अंजाम दिया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान में निकले रोजगार के एक विज्ञापन का जिक्र किया। इसमें सफाई के कामों के लिए कर्मचारियों की वैकेंसी निकाली गई थी। इस वैकेंसी में सिर्फ गैर-मुस्लिमों को ही पात्र बताया गया था।
".....लगा कि मुझे तो कोई प्रॉब्लम ही नहीं है, दुनिया बदल गई। यहाँ तक कि वहाँ मौजूद सभी नर्सों में मुझे हूरें नजर आने लगी। मैंने डॉक्टर को दोबारा वही टीका लगाने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने मुझे दूसरा पेनकिलर नहीं दिया। यहाँ के डॉक्टर वाकई तारीफ के काबिल हैं।”
"मुस्लिमों को हमेशा काले रंगों में डार्क लाइटिंग के साथ दिखाया गया। जबकि हिंदुओं को रोशनी और रंगीन कपड़ो में। ये बेहद शर्मनाक और खतरनाक है। हम ऐसी फिल्मों के जरिए अपने बच्चों को जाहिल बना रहे हैं।"