धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सीता ने पहली बार छठ पूजा बिहार के मुंगेर में गंगा तट पर की थी। इसके प्रमाण स्वरूप आज भी यहॉं अर्घ्य देते उनके चरण चिह्न मौजूद हैं।
व्हाट्सएप ने कहा है कि वह निजता की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार की चिंता से सहमत हैं। मामले की गंभीरता को समझते हुए उसने कठोर क़दम उठाए हैं। उसकी पूरी कोशिश है कि किसी भी यूजर्स के डेटा के साथ खिलवाड़ ना हो।
मौलाना फजलुर रहमान का आजादी मार्च 27 अक्तबूर को शुरू हो शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुॅंचा था। उन्होंने इमरान से दो दिन में इस्तीफा देने या गंभीर नतीजे भुगतने की चेतावनी दी है।
बिड़ला ने कहा कि अभी भी बेहतरी की बहुत सी सम्भावनाएँ हैं। हमें याद रखना चाहिए कि भारत में कारोबार का मतलब केंद्र और राज्य दोनों की सरकारों के साथ काम करना होता है। इस मायने में पहले से स्थिति काफी बेहतर हुई है।
सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ में सूर्य के साथ-साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण (ऊषा) और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अर्घ्य देकर दोनों का नमन किया जाता है।
'रेडियो कश्मीर' का नाम अब 'ऑल इंडिया रेडियो' हो गया है। इसके साथ ही लोगों को लस्सा कौल याद आ रहे हैं। दूरदर्शन कश्मीर के डायरेक्टर रहे कौल की हत्या जेकेएलएफ के आतंकियों ने कर दी थी।
"भारत से करतारपुर आने वाले सिखों के लिए दो बातें जरूरी हैं। पहला उन्हें पासपोर्ट की जरूरत नहीं है केवल एक वैध पहचान पत्र चाहिए और दूसरा उन्हें 10 दिन पहले रजिस्ट्रेशन कराने की कोई आवश्यकता नहीं है।"
मौलाना फजलुर्रहमान ने इमरान पर 2018 के आम चुनाव जीतने के लिए धांधली का आरोप लगाया है और इस्तीफे की माँग कर रहे हैं। रहमान ने इमरान खान पर आर्थिक कुप्रबंधन, अक्षमता और खराब शासन के चलते आम लोगों की जिंदगी को कठिनाईयों से भरा बनाने का भी आरोप लगाया है।
"मैडम स्पीकर, जम्मू-कश्मीर के लोग बेहतर के हकदार हैं और स्थिति को देखते हुए साहसी कदम उठाकर प्रधानमंत्री मोदी ने सही किया। जम्मू-कश्मीर के दर्जे में बदलाव को संसद द्वारा दो-तिहाई बहुमत से पारित किया गया जो सुधारों की आवश्यकता की जरूरत पर आम सहमति को दर्शाता है।"
चीन ने आरोप लगाया है कि भारत और अमेरिका FATF का राजनीतिकरण करने में लगे हुए हैं। यह बयान चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ़ से दो दिन पहले ही दिया गया है। चीन की इस तिलमिलाहट की असल वजह पाकिस्तान में अरबों डॉलर निवेश है, जो अब उसे ख़तरे में दिखाई दे रहे हैं।