बलूचिस्तान के नेताओं को पाकिस्तान के डर से देश से बाहर रहना पड़ रहा है। पीओके के समाजसेवी पाकिस्तान पर आरोप लगा रहे हैं। सिंध में लड़कियों का जबरन धर्मांतरण हो रहा है। लेकिन, मलाला कश्मीर पर पाकिस्तानी नैरेटिव चलाने में लगी हैं, वो भी बिना सबूतों के।
108 घंटे तक चले इस ऑपरेशन के दौरान 18 सितम्बर को भारतीय सेना हैदराबाद में घुसी। हैदराबाद की सरकार ने 17 सितम्बर को ही इस्तीफा दे दिया था। हाउस अरेस्ट में किए जाने का बाद निज़ाम अब ये कह कर भुलावा दे रहा था कि वह नई सरकार का गठन करेगा।
झुनझुनवाला ने कहा कि मोदी के वोटर जो चाहते थे, वह सब उन्होंने किया। उनके वोटर 370 हटाना चाहते थे। उनके वोटर राम मन्दिर चाहते हैं। उन्होंने इन वादों पर काम किया है।" झुनझुनवाला ने मोदी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का भी ज़िक्र किया।
पाकिस्तानी सेना अपने ही सैनिकों की लाशों के साथ जातीय भेदभाव करती रहती है। मारे जाने वाले सैनिक कश्मीरी (या नॉर्दर्न लाइट इन्फेंट्री के होते हैं तो उनकी लाशें लेने में हिचकता है, जबकि मजहब विशेष के पंजाबी सैनिकों की लाशें वह हर कीमत पर पाने का प्रयास करता है।
मात्रा बड़ी महत्वपूर्ण चीज़ होती है। सिर्फ खाने में ही नहीं, भाषा में भी इसका अपना महत्व है। इसके होने या न होने से कई बार शब्दों के अर्थ बदल जाते हैं। हिन्दी भाषा में मात्रा उच्चारण के हिसाब से लगती है- जो आप बोलते हैं, पक्का-पक्का वही लिखा जाता है।
इमरान खान की रैली में भीड़ दिखाने के लिए पाकिस्तान के एबटाबाद और रावलपिंडी से लोगों को ट्रकों में भरकर लाया गया। पीओके के राजनीतिक कार्यकर्ता अमजद अयूब ने बताया कि इस रैली का बहिष्कार करने पर पीओके की जनता को वैश्विक समुदाय से बधाई मिलनी चाहिए।
जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से ही पाकिस्तान बौखलाहट भरी प्रतिक्रिया दे रहा है। इसके बावजूद एससीओ के कॉन्फ्रेंस में उसे आमंत्रित किया गया था। सम्मेलन में 27 विदेशी और 40 भारतीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया था।
इस दौरान महिला सांसदों के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। गो नियाजी गो से पाकिस्तानी संसद गूँजती रही, मार्शलों को भी मामला शांत करवाने के लिए बुलवाया गया, लेकिन नेता अपने काबू से बाहर होकर एक दूसरे पर लात-घूसा चलाते रहे।
नाइक का दावा है, "भाजपा सरकार ने 370 हटाने का काम समुदाय को मज़हबी तौर पर निशाना बनाते हुए किया है। यह भारत की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी के खिलाफ 'act of war' है, जिसे केवल इसलिए किया गया, क्योंकि कश्मीर के बहुसंख्यक मुस्लिम थे।"
"इस्लामाबाद में भी धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ कभी हिंसा, नरसंहार, असाधारण हत्या, अपहरण, बलात्कार, धर्म परिवर्तन जैसे मामलों के रूप में भेदभाव होता हैं। जिनमें पाकिस्तानी हिंदू, ईसाई, सिख, अहमदिया और शिया उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों में से एक हैं।"