खलीज टाइम्स को दिए साक्षात्कार में मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने जम्मू-कश्मीर के अलग-थलग पड़े रहने की स्थिति को खत्म करने के लिए अनुच्छेद 370 को निरस्त किया। उन्होंने कहा, "अलग-थलग पड़े रहने से कुछ युवा कट्टरपंथी बन गए और हिंसा तथा आतंकवाद के रास्ते पर चल पड़े।"
पत्र में जजों से इसे गंभीरता से लेने को कहा गया है। हालॉंकि किसी आवश्यक परिस्थिति में वे मुख्य न्यायाधीश को मैसेज भेज सकते हैं। रजिस्ट्रार जनरल ने जिला जजों से अपने अधीनस्था न्यायिक कर्मचारियों को भी इस संबंध में निर्देशित करने को कहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस से रवाना होने के बाद ट्वीट करके बताया कि उनका फ्रांस दौरा काफी सफल रहा। उन्होंने कहा कि इस दौरान दोनो देशों के बीच अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत हुई। यह बातचीत आपसी सहयोग को बढ़ाएगी और नए मौके देगी।
अर्शी ख़ान ने इस साल की शुरुआत में ही कॉन्ग्रेस का हाथ थामा था। पार्टी में उन्हें एक बड़ा पद भी दिया गया था। उन्होंने तब ये भी कहा था कि वो लोकसभा चुनाव में भाग लेंगी। पार्टी ने उन्हें मुंबई प्रदेश माइनॉरिटी वेलफेयर कमिटी का वाइस प्रेसिडेंट बनाया था, लेकिन...
"सर आप इस इमेज को ट्वीट करके चिदंबरम के ख़िलाफ़ पुलिस द्वारा किए जा रहे 'अत्याचार' को बंद करवा सकते हैं।" इस पर पाकिस्तानी सांसद ने तीव्र उत्सुकता में आकर लिख डाला - संयुक्त राष्ट्र के साथ इस इमेज को शेयर कर रहा हूँ।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट के नेता सरदार सागीर ने घाटी में बिगड़े हालात के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए उनका खुद का देश पाकिस्तान ही आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है।
पीएम मोदी मनामा में एक विशेष समारोह में श्रीनाथजी (श्री कृष्ण) मंदिर की पुनर्निर्माण परियोजना का शुभारंभ करेंगे। इसी तरह वह बहरीन का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी बन जाएँगे।
मलिक ने आगे बढ़कर दावा किया कि पीएम मोदी और डोभाल लोगों से उसे (रहमान मलिक) परेशान करने के लिए कह रहे हैं। रहमान मलिक को यह भ्रम हो गया है कि उसने पीएम मोदी और डोभाल की नींद हराम कर दी है।
"हर जगह यह नियम है कि अगर सेल्फ डिफेंस, अपनी प्रोटेक्शन के लिए कुछ चीज रख सकते हो तो रखो। तुम मुस्लिम भाइयों, मारो तो जान से मारो, जब उनकी लाशें उनके घरों में जाएँगी फिर उनको एहसास होगा कि इंसान की जिंदगी क्या होती है?"
सावरकर की प्रतिमा पर यह देश बेवजह अपना समय और संसाधन व्यर्थ करता है। सर सैयद अहमद खान के योगदान और उनके ज़हरीले, हिन्दू-विरोधी और हिंसक भाषणों को याद करने भर से ही तय हो जाता है कि इस देश को किन लोगों पर गर्व होना चाहिए।