पाकिस्तान के संसद में इमरान खान ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) की समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मौजूदा माहौल में भारत के सभी नागरिकों के अधिकार समान नहीं हैं।
“मोदी सरकार कश्मीर को दूसरा फिलिस्तीन बनाना चाहती है। वह वहाँ की जनसांख्यिकी में बदलाव करने के लिए बाकी लोगों को कश्मीर में बसाना चाहती है। सांसदों को तुच्छ मुद्दों पर लड़ना बंद करके भारत को खून, आँसू और पसीने से जवाब देना चाहिए और अगर जंग थोपी जाए तो हमें जंग के लिए तैयार रहना चाहिए।”
शाहिद अफरीदी ने कल रात डोनल्ड ट्रंप को टैग करते हुए कश्मीर मामले पर अपनी बौखलाहट निकाली। लेकिन भारत के पूर्व आक्रमक बल्लेबाज गौतम गंभीर और फिलहाल भाजपा के सांसद ने उन्हें जवाब देने में देर नहीं लगाई।
"पाकिस्तान कश्मीर में जनमत संग्रह की बात करता है, लेकिन क्या वह यही अधिकार अपने यहाँ के उन अल्पसंख्यकों को देने के लिए तैयार है, जो सांस्कृतिक व जातीय भिन्नता के कारण हाशिये पर हैं?"
दुर्घटना की सूचना मिलते ही SDRF की टीम मौक़े पर पहुँच गई है और घायल बच्चों को नजदीकी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे में 5 बच्चों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। अस्पताल में घायल बच्चों को हर संभव इलाज देने का प्रयास किया जा रहा है।
"अगर हिंदुस्तान सच में 370 को हटा कर कश्मीर का पूर्ण विलय हिंदुस्तान में कर ले गया तो ट्रम्प का कश्मीर मामले पर मध्यस्थता करना पाकिस्तान को ही महँगा पड़ेगा।"
पाकिस्तान ने भारत के इस फ़ैसले पर कहा है कि कश्मीर का मुद्दा एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है। इसलिए भारत सरकार इस मसले पर एकतरफ़ा फ़ैसला नहीं कर सकता। ऐसा करने से कश्मीर का मुद्दा हल नहीं होगा, इसलिए यह फ़ैसला न तो पाकिस्तान को स्वीकार्य है और न ही जम्मू-कश्मीर के लोगों को स्वीकार्य है।
मोदी सरकार के इस फैसले ने जहाँ विपक्ष को बेचैन किया वहीं पाकिस्तान में भी उथल-पुथल मच गई। राजनेताओं से लेकर पाकिस्तान के कलाकार और आम जनता भी इस विषय पर अपना मत रख रहे हैं। इस खबर को पाकिस्तानी मीडिया अपनी हेडलाइनों में लगातार ब्रेकिंग बनाकर चला रहा है।
नेहरू और इंदिरा ने 370 की आड़ में शेख अब्दुल्ला से विभिन्न करार किए, जिनकी न कोई वैधानिकता थी न ज़रूरत। उन्हीं करारों के चलते जम्मू-कश्मीर राज्य को अलग झंडा और न जाने क्या-क्या दे दिया गया, जिसके कारण बाद के वर्षों में अलगाववाद को हवा मिली।
"रितेश ने प्रभु चावला के साथ मेरा पहला इंटरव्यू देखा था और तभी से वो मेरे फैन हो गए थे। इसके बाद मैसेज के जरिए उनसे बात होने लगी। रितेश को जानने के बाद मैं जीसस से प्रार्थना कर रही थी कि उन्हीं की पत्नी बनूँ, मेरी ख्वाहिश पूरी हो गई।"