सवाल यह भी है कि क्या हम खुद अपने मंदिरों पर जारी हमलों को उसी तरह देखने और बयान करने की हिम्मत जुटाएँगे जैसा वो सचमुच हैं? सेकुलरिज्म का टिन का चश्मा हम अपनी आँख से उतारेंगे क्या?
टिक टॉक ने अपने बचाव में कहा कि उसे ‘अश्लील और अनुचित सामग्री’ के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है, जो प्लेटफ़ॉर्म पर थर्ड-पार्टीज अपलोड करती है। टिक टॉक ने इस आदेश को भेदभावपूर्ण और मनमाना बताया है।
कुछ मुस्लिमों ने तो यहाँ तक कहा कि नॉन-मुस्लिम इमारतों व पूजा घरों का इस तरह से बर्बाद होना इस्लाम की सत्यता की पुष्टि करता है। कुछ ने कहा कि ये अल्लाह का दंड है जो इस्लाम न मानने वालों को मिलता है। दुनिया भर के कई हिस्सों के मुस्लिमों ने इस आग को लेकर ख़ुशी मनाई।
फ़िल्म को समीक्षकों के एक गिरोह ने रिव्यु करने से या तो मना कर दिया या नेगेटिव रिव्यु दिया। मीडिया गिरोह ने इसे प्रोपेगंडा बताया। बस 250 स्क्रीन्स में रिलीज होने वाली एक छोटी सी फ़िल्म से इतना ज्यादा भय? इसका अर्थ है कि इसके निर्माण के पीछे का मोटिव सफ़ल रहा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 में पाकिस्तान में अपनी आस्था के मुताबिक जिदंगी गुजारने पर अल्पसंख्यकों ने उत्पीड़न का सामना किया, उन्हें गिरफ्तार किया गया। यहाँ तक की कई मामले में उनकी मौत भी हुई।
चीन ने उइगरों पर कई तरह की पाबंदियाँ लगाई रखी है। लाखों उइगरों को हिरासत केंद्रों में रखा गया है और चीन इन हिरासत केंद्रों को व्यावसायिक शिक्षा केंद्र कहता है। चीन उनके ऊपर नियंत्रण का जाल बिछा रहा है, जो कम्युनिस्ट पार्टी के स्वचालित तानाशाह के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
निर्यात में 9 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। निर्यात अब 331 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। पिछले वर्ष यह 303 बिलियन डॉलर था। इसके साथ ही 2013-14 का वो रिकॉर्ड भी धराशयी हो गया जब निर्यात 314.4 अरब डॉलर दर्ज किया गया था।
कैबिनेट की मंजूरी से, 158 केंद्रीय शैक्षिक संस्थानों में 2019-20 शैक्षणिक सत्र के दौरान 2 लाख से अधिक अतिरिक्त सीटें बनाई जाएँगी, जबकि 2020-21 में 95,783 सीटें जोड़ी जाएँगी।
सुधींद्र हेब्बार सिडनी एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग ऑफिसर के तौर पर काम कर रहे थे और उन्हें पीएम मोदी को वोट देने के लिए छुट्टी चाहिए थी, लेकिन जब उन्हें वोटिंग के दिन की छुट्टी नहीं मिली तो उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
योगिता इस पेशे में किसी ‘स्टीरियोटाइप को तोड़ने’ या ‘पितृसत्ता को चुनौती देने’ के लिए नहीं हैं- यह उनकी ज़रूरतों को पूरा करने का सबसे बेहतर तरीका भर है।