उन्होंने कहा- मैं मर जाऊँ तो मेरी एक अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना। वे बोले- उठा शमशीर, दिखा अपना हुनर, क्या लेगा, ये रही जान, ये गर्दन है, ये सर, क्या लेगा...एक ही शेर उड़ा देगा परखच्चे तेरे, तू समझता है ये शायर है, कर क्या लेगा।
कन्हैया के काफिले पर यह हमला उस वक्त हुआ, जब वो कटिहार के राजेंद्र स्टेडियम में सभा करने के बाद भागलपुर जा रहे थे। शहीद चौक के पास लोगों ने कन्हैया कुमार के विरोध में पोस्टर दिखाए और फिर आगे बढ़ने पर काफिल पर जूते-चप्पल फेंके गए।
उसने कहा कि सरकार ने एनआरसी न लाने की बात कही है, इसे लोगों को अपनी जीत समझना चाहिए। दारुल उलूम देवबंद के ठंडे पड़े तेवर को शाहीन बाग़ प्रदर्शन पर लगे कई आरोपों से जोड़ कर देखा जा रहा है। क्या विदेशी फंडिंग की पोल खुलने से दारुल उलूम डर गया है?
गुंजा कपूर के साथ हुई घटना की सच्चाई इससे कहीं ज्यादा भयावह और डरावनी है, जितना कि टीवी पर दिखाई गई। गुंजा के साथ ना सिर्फ बदसलूकी की गई, बल्कि उनके साथ हाथापाई भी की गई। भीड़ ने गुंजा से इस्लामिक नारे लगाने के लिए कहा। भीड़ में से एक शख्स ने उससे कलीमा (ला इलाहा इल्लल्लाह) पढ़कर...
24 घंटों के अंदर बिहार में CPI नेता कन्हैया कुमार पर दोबारा हमला किया गया। इससे पहले भी उनकी कार पर पथराव किया गया था, जिसमें उन्हें और उनके ड्राइवर दोनों को चोटें आई थीं। इस बार उनकी गाड़ी पर पथराव होने से...
हमलावरों ने पहले बीजेपी नेता पर गोली चला दी। गोली बीजेपी नेता के पैरों में जा लगी। जिससे घायल होकर वह जमीन पर गिर गए। इसके बाद उन गुंडों ने धारदार चाकू से उनके दम तोड़ने तक ताबड़तोड़ वार किए।
CCTV फुटेज में देखा गया कि आरोपित महिलाओं के पहले करीब जाता है, उन्हें दबोचता है और फिर उन्हें किस करके वहाँ से भाग जाता है। हबिबूर की हरकतें कैमरे में रिकॉर्ड होने के बाद पुलिस ने ये एक्शन लिया।
देश में एक ऐसा प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान है, जहाँ वामपंथियों ने JNU से भी ज़्यादा तबाही मचा रखी है। निर्भया का बलात्कारियों के समर्थन से लेकर सेना को बलात्कारी और हिंसक बता तक, वहाँ के वामपंथी छात्र और प्रोफेसर घृणा की नई इबारत लिख रहे हैं। TISS में वामपंथियों की साज़िश का भंडाफोड़।
"1700 -1707 के बीच महाराष्ट्र में सर्वप्रमुख प्रेरक शक्ति कोई मंत्री न होकर महारानी ताराबाई ही थीं जिन्होंने अपनी कुशल प्रशासनिक दक्षता तथा मजबूत चारित्रिक क्षमता के बल पर उस कठिन समय पर राष्ट्र की रक्षा की।"