गार्गी कॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक फेस्ट का छह फरवरी को अंतिम दिन था। कुछ छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन से छेड़छाड़ की शिकायत दी थी। उन्होंने बताया था कि कॉलेज परिसर में दोपहर को जबरन घुसे बाहरी लोगों ने छात्राओं के सामने अश्लील हरकत कर छेड़छाड़ की। इस घटना पर गुस्सा जाहिर करते हुए उन्होंने इसे सुरक्षा में भारी चूक करार दिया था।
मंदिर, वैदिक स्कूल, मैरिज हॉल और अस्पताल के निर्माण के लिए धनराशि श्रद्धालुओं से जुटाई जाएगी और तिरुमला तिरुपति देवस्थानम भी यथासंभव सीमा तक अपना योगदान देगा।
गार्गी कॉलेज के सम्बन्ध में जब कॉलेज की छात्राओं से ऑपइंडिया ने बात की तो उन्होंने बताया कि उत्पीड़न वाली बात से मना नहीं किया जा सकता है लेकिन धार्मिक नारे लगाने जैसी बातें एकदम बेबुनियाद है और मीडिया द्वारा इस मुद्दे को दूसरी ही दिशा दी जा रही है।
53 साल के शहबाज खान पर 19 साल की किशोरी के आरोप लगाने के बाद, अपमान करने के इरादे से महिला पर हमला या आपराधिक बल और महिला के शील भंग करने के लिए अपमानसूचक शब्द या इशारा करने (IPC की धारा 354,और 509) जैसे आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज हुआ है।
पीड़िता के ससुर ने उसे खेत में सिंचाई के लिए साथ चलने के लिए कहा। इस पर वह अपने ससुर के साथ खेत पर सिंचाई करने चली गई। लेकिन वहाँ उसके ससुर ने उसके मुँह में कपड़ा ठूँसकर उससे बलात्कार किया।
इस पोस्टर में लिखा हुआ है- "अरे ओ सुन ले, तू हमें करंट क्या लगाएगा? अब तू दिल्ली से ही नहीं, हिंदुस्तान से भी जाएगा।" शाहीन बाग़ वालों से जब मीडिया ने सवाल पूछा तो वो गुजरात दंगे की बातें करने लगे। भाजपा के प्रति अपने नफरत का इजहार करने लगे।
आरिफ और उसके परिवार वाले बोलेरो की मॉंग कर रहे थे। मॉंग पूरी नहीं होने पर आरिफ ने पहले तीन तलाक दे सीमा को घर से निकलने को कहा। इसका विरोध करने पर परिजनों के साथ मिल उसे आग के हवाले कर दिया।
भास्कर पहले शुद्ध शाकाहारी था लेकिन अपनी गर्लफ्रेंड को पाने के लिए उसने माँसाहार शुरू किया। ईसाई होने के कारण पहले वो चर्च जाता था लेकिन फिर वो दिन भर में 5 बार नमाज़ पढ़ने लगा। उसने नमाज पढ़ते हुए और इस्लामी आयतें पढ़ते हुए कई वीडियो बनाए और लड़की के परिवार वालों को संतुष्ट करने के लिए उन्हें भेजे।
दिल्ली साकेत कोर्ट ने इस मामले के 'किंगपिन' और दोषी करार दिए गए ब्रजेश ठाकुर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह प्रकरण मुंबई के टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) की रिपोर्ट के बाद सामने आया था।
आज मतगणना के दिन शाहीन बाग में सन्नाटा है, जहाँ सुबह से ही प्रदर्शनकारी जुटने लगते थे, वहीं मंगलवार को शाहीन बाग पूरी तरह खाली नज़र आया, दोपहर के समय में मात्र इक्का-दुक्का लोग दिखाई दिए। क्या शाहीन बाग दिल्ली विधान सभा चुनाव स्टंट का एक हिस्सा था? अब जब उन्हें कोई हटा नहीं रहा है तो वे खुद ही शाहीन बाग छोड़ के क्यों चले गए हैं?