स्वराज्य अभियान और प्रशांत भूषण दंगाईयों को क़ानूनी मदद उपलब्ध कराते हैं। नागरिकता क़ानून के नाम पर देश में अराजकता फैलाने के लिए इन विरोध प्रदर्शनों को और जारी रखना स्वराज्य अभियान और प्रशांत भूषण जैसे लोगों का कुचक्र है। पढ़ें व्हाट्सप्प चैट।
नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में वामदलों और कुछ मुस्लिम संगठनों ने आज भारत बंद का ऐलान किया था। इसी विरोध-प्रदर्शन में पहुँचे इतिहासकार रामचंद्र गुहा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
हसीना बेन मूलरूप से भारत की ही रहने वाली थीं, लेकिन 1999 में निक़ाह हो जाने के बाद वो पाकिस्तान चली गईं थी। पाकिस्तान में उनके शौहर की मृत्यु हो जाने पर उन्होंने भारत वापस आने का फ़ैसला किया। दो साल पहले ही उन्होंने भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया था, जिसे...
"दास्तान लाइव रॉक बैंड के समूह ने अपमानजनक (गालियाँ) शब्दों के साथ "ओम" का उच्चारण किया। इसके अलावा, उन्होंने जानबूझकर हिंदू धर्म के लोगों की भावनाओं को आहत किया और सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल 2019 के मंच का दुरुपयोग किया।"
नाजिल बच्ची को बहला-फुसला कर सामान दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया था और उसका रेप किया। इसके बाद पकड़े जाने के डर से उसने बेरहमी से मासूम का गला दबाकर हत्या कर दी। बच्ची की मौत हो जाने के बाद नाजिल ने उसके शव पर तेजाब डालकर उसे जला दिया।
गुरुवार को कई वामपंथी व मजहबी संगठनों ने बंद का आयोजन किया था। पुलिस को ख़ुफ़िया सूचना मिली कि इस्लामी संगठनों और वामपंथियों के विरोध प्रदर्शन की आड़ में कुछ देशविरोधी ताक़तें हिंसा पर उतर सकती हैं और दिल्ली की तर्ज पर बेंगलुरु में भी दंगा भड़काया जा सकता है।
उन दंगों के कारण केरल से 1 लाख हिन्दुओं को भाग कर अपनी जान बचानी पड़ी थी। कॉन्ग्रेस पार्टी की अध्यक्ष रहीं एनी बेसेंट ने इस बारे में अपनी पुस्तक में एक घटना का जिक्र करते हुए लिखा है कि हिन्दुओं का बुरी तरह से कत्लेआम किया गया। जिन्होंने भी इस्लाम अपनाने से इनकार किया, उन्हें या तो मार डाला गया, या फिर उन्हें भाग कर जान बचानी पड़ी।
संशोधित नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के नाम पर मजहबी उन्माद फैलाने की साज़िश रची जा रही है। यहाँ तक कि मस्जिदों से घोषणा की गई ताकि उपद्रवी सड़क पर उतर कर हिंसा करें। इन घोषणाओं का परिणाम क्या हुआ, ये दिल्ली ने भुगता और पूरे देश ने देखा। खुद एक प्रदर्शनकारी ने...
डीयू के छात्रों को उम्मीद है कि जो वामपंथी दिन-रात 'आज़ादी' के नारे लगाते हैं और 'आज़ादी' की माँग कर रहे हैं, वो 'आज़ादी' उन्हें मुफ्त में मिल रही है तो वो ज़रूर आकर ले जाएँगे। ऑपइंडिया को मिली ताज़ा सूचना के अनुसार, अभी तक एक भी वामपंथी 'आज़ादी' लेने नहीं पहुँचा।
कुछ लोग हिंसा भड़का कर नॉर्थ-ईस्ट को जलाना चाहते हैं। हम आपके लिए वो 11 झूठ लेकर आए हैं, जिसका इस्तेमाल कर के CAA को असम सहित अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों के ख़िलाफ़ बताया जा रहा है। 11 झूठ और उन सभी को काटता हुआ सच का पुलिंदा। इसे नोट कर लें।