मैं सही साबित हुआ, मेरी मेहनत लाई रंग: राम रथी आडवाणी का अयोध्या फैसले पर कथन

आज अयोध्या का फैसला आने के बाद सबसे ज़्यादा जिन दो लोगों के बारे में बात हुई, वे हैं विश्व हिन्दू परिषद के स्वर्गीय मुखिया अशोक सिंघल, और उनके साथ राम रथ यात्रा निकालने वाले भाजपा के पितृ पुरुष लाल कृष्ण आडवाणी।

आज अयोध्या का फैसला आने के बाद सबसे ज़्यादा जिन दो लोगों के बारे में बात हुई, वे हैं विश्व हिन्दू परिषद के स्वर्गीय मुखिया अशोक सिंघल, और उनके साथ राम रथ यात्रा निकालने वाले भाजपा के पितृ पुरुष लाल कृष्ण आडवाणी। इस ऐतिहासिक क्षण के एक दिन पहले कल ही अपना 93वाँ जन्मदिन मनाने वाले आडवाणी, जिन्होंने अपना कैरियर फिल्म समीक्षा पत्रकार के रूप में शुरू किया था, ने अंग्रेजी में एक बयान जारी कर फैसले से संतोष जाहिर किया है। साथ ही कहा है कि अंततः उनका स्टैंड सही साबित हुआ है।

 
पेश है उनके कथन का हिंदी रूपांतरण: 

आज मैं अपने देशवासियों के साथ खुले दिल से अयोध्या मामले में 5 सदस्यों वाली सुप्रीम कोर्ट की संविधानिक पीठ द्वारा दिए गए इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करता हूँ।

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मेरा स्टैंड सही साबित हुआ है और मुझे बेहद ख़ुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने एकमत से निर्णय देकर अयोध्या में राम जन्मभूमि पर श्री राम का भव्य मंदिर बनाने की राह प्रशस्त की है।

मेरे लिए यह बेहद संतुष्टि का क्षण है क्योंकि ईश्वर ने मुझे एक मौका दिया था इस जनांदोलन का छोटा सा हिस्सा बनने का। यह आंदोलन भारत की आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा आंदोलन था, जिसका लक्ष्य वही था जो आज सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद से पूरा होने जा रहा है।

मैंने हमेशा इस पर ज़ोर दिया था कि राम और रामायण भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतात्मक विरासत में एक सम्मानित स्थान रखते हैं, और रामजन्मभूमि की देश और विदेश में हमारे करोड़ों देशवासियों के दिल में विशेष और पवित्र जगह है। अतः यह अभिभूत कर देने वाली बात है कि उनके विश्वास और भावनाओं को सम्मान मिला है।

मैं सर्वोच्च न्यायालय के अयोध्या में मस्जिद बनाने के लिए पाँच एकड़ ज़मीन दिए जाने का भी स्वागत करता हूँ। आज का निर्णय एक ऐसी लम्बी और दुरूह प्रक्रिया का पटाक्षेप है जो पिछले कई दशकों से कई मंचों पर चल रही थी- न्यायिक भी, और गैर-न्यायिक भी। अब जबकि इतना लम्बा चला अयोध्या का मंदिर-मस्जिद विवाद अपने अंत पर पहुँच गया है, तो समय आ गया है कि सभी विरोध और वैमनस्यता पीछे छोड़ें और साम्प्रदायिक सौहार्द और शांति को गले लगाएँ। इस हेतु के लिए , मैं हमारे विभिन्नताओं वाले समाज से एक साथ काम कर भारत की राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मज़बूत करने की  करता हूँ।

रामजन्भूमि आंदोलन के दौरान मैंने कई बार कहा है कि अयोध्या में राम मंदिर बनाने जा सच्चा मकसद एक भव्य राष्ट मंदिर बनाने का है- भारत को एक सशक्त, वैभवपूर्ण, शांतिप्रिय और सौहार्दपूर्ण राष्ट्र बनाने का जिसमें सभी के साथ न्याय को और कोई जिससे बाहर न हो। हम सभी को उस आर्य लक्ष्य के लिए आज से समर्पित हो जाना चाहिए। 

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