जहाँ पढ़ने जाती थी हिंदू नाबालिग लड़की, उसी कोचिंग सेंटर के मालिक ने उसको अपने प्रेम जाल में फँसाया। फिर 17 साल की लड़की को फर्जी ऐफिडेविट से 19 साल का बनाया। अंततः लड़की के साथ मस्जिद में निकाह की खबर के बाद फरार...
तुषार मेहता के अनुसार INX मीडिया के अलावा भी कई कम्पनियाँ संदिग्ध हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि ईडी ने 16 कम्पनियाँ चिह्नित की हैं, जिनके मनी लॉन्ड्रिंग और संदेहास्पद आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने की शंका है।
लड़की एक दिहाड़ी मजदूर की बेटी है। जो गाँव में अपनी दादी के पास रहती थी। 11वीं कक्षा में पढ़ने के दौरान पहले उसका यौन शोषण एक पादरी ने किया, फिर एक नाइजिरियन ने शादी का झाँसा देकर उसके साथ लगातार 4 दिन वही सब दोहराया।
2014 में रुखसाना ने राहुल से शादी की। दोनों को एक बेटी हुई - रुखसार। 2017 में राहुल की मौत हो गई। रुखसाना के घरवालों ने उसका निकाह किसी और से करवा दिया, जहाँ तलाक हुआ। इसके बाद एक और निकाह हुआ दानिश से। इसी सौतेले बाप दानिश ने...
स्थानीय निवासी के अनुसार वह अपने परिवार के एक सदस्य को लेकर बीमारी से ठीक करवाने के लिए इन पादरियों की धर्मपरिवर्तन सभा में गया था। जहाँ कुछ ग्रामीणों ने उससे कहा कि धर्मपरिवर्तन के बाद एक शीशी से पवित्र जल पिलाने से उसके परिजन की बीमारी दूर हो जाएगी।
"संस्कृत पढ़ना कोई कौतूहल की बात नहीं है पर संस्कृत प्रेमी कहना पूर्ण सत्य नहीं है यदि फिरोज संस्कृत प्रेमी होते तो दूसरे के धर्म पर आघात नहीं करते मुझे लगता है ये केवल व्यवसायिक तौर पर ही संस्कृत को पढ़ें है यदि ये तीन पीढ़ी से संस्कृत ही पढ़ रहे हैं, भजन-श्लोक गाने में ही रूचि है तथा वैचारिक रूप से सनातनी ही है तो फिर इन्होंने अबतक सनातन धर्म क्यों नहीं अपना लिया?"
राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी अशोभनीय हरकत की थी। उन्होंने अदालत में दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में पेश किए गए नक्शे को फाड़ दिया था। उनकी इस हरकत पर सीजेआई ने काफी नाराजगी जताई थी।
गुजराल जब एयरपोर्ट के मेटल डिटेक्टर से गुजर कर निकले, तो कोई अलार्म नहीं बजा। यानी, उनके शरीर पर या पगड़ी में किसी सुरक्षा उपकरण ने कोई खतरनाक या संवेदनशील चीज़ नहीं थी। इसके बावजूद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें पगड़ी उतारने के लिए कहा।
मामले के दो मुख्य पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड और इकबाल अंसारी ने पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करने का फैसला किया है। एआईएमपीएलबी ने कहा है कि इस फैसले से न उसे फर्क पड़ता है और न इसका उसकी याचिका पर कानूनी तौर पर कोई फर्क पड़ेगा।
"जब कोई ऐसा कुलपति (VC) हो जिसे न उस संस्थान और उसके संस्थापक के मूल्य पता हों, न हिन्दू धर्म में आस्था तो ऐसा अनर्थ होना स्वाभाविक हो जाता है। सरकार को सोचना चाहिए जब वो कुलपति का चुनाव करती है कि कहाँ के लिए कैसा कुलपति उपयुक्त है।"