एक शख्स हाथ में पानी से भरे लौटे को पकड़ता है। दूसरे हाथ से उसमें नमक डालता है। इस दौरान वह अपनी जुबान से एक वादा या वचन देता है, जिसे पूरा करने की वो कसम खाता है। लौटे में नमक डालने के बाद वो किसी भी सूरत में अपने वचन को पूरा करने से पीछे नहीं हट सकता है। यही प्रथा कहलाती है- लूण लोटा। हिमाचल प्रदेश के कई भागों में यह प्रथा आज भी प्रचलित है।
शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान हिन्दू महासभा ने कुछ कागज़ात और नक़्शे दिए थे। अदालत में ही धवन ने उन्हें एक-एक कर फाड़ना शुरू कर दिया। जब मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने उन्हें टोका तो उन्होंने कुछ और पन्ने फाड़ डाले।
अनस मुमताज हॉस्टल में तीन साथियों के साथ कमरा नंबर 22 में रहता था। मंगलवार की रात जब उसका एक रूम पार्टनर कमरे में पहुँचा तो वह फंदे पर लटका मिला। इसके बाद सारे छात्र वहाँ जमा हो गए।
दावे से पीछे हटने के बदले में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने तीन शर्तें रखी है। उसने कहा है कि एएसआई के नियंत्रण में जितने भी धार्मिक स्थल हैं, उनकी स्थिति की जाँच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट एक समिति बनाए।
मध्यस्थता पैनल ने कहा है कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड विवादित स्थल पर अपने दावे से पीछे हट गया है। इस संबंध में शीर्ष अदालत में वह हलफनामा दायर कर सकती है। हालॉंकि बोर्ड किन शर्तों पर राजी हुआ है, इस संबंध में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
पीड़ित पक्ष की ओर से आरोपित पति समेत पाँच के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया गया है। अभी किसी के गिरफ्तारी की सूचना नहीं हैं। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि काला धन और कर अधिरोपण कानून अप्रैल 2016 से पहले लागू नहीं होगा। इस आधार पर आयकर विभाग को खेतान के खिलाफ कार्रवाई करने से रोक दिया था। उनके खिलाफ काला धन रखने का मामला दर्ज किया गया था।
पराशरण ने कहा- यह राम का जन्मस्थान है, इसे बदला नहीं जा सकता। किसी को भी भारत के इतिहास को तबाह करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। कोर्ट को इतिहास की गलती को ठीक करनी चाहिए।
फुरकान अली के अनुसार उनके ऊपर लगे सभी आरोप फर्जी हैं। उनका मत है कि उनके स्कूल में सरस्वती वंदना भी करवाई जाती है, लेकिन चूँकि उनके स्कूल में 90 फीसद बच्चे मुस्लिम हैं तो उनके आग्रह पर इस्लाम की प्रार्थना करवाई जाती है।