इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि सात लोगों के घायल होने की सूचना है। घटना की सूचना पाकर मौके पर पुलिस और सुरक्षाबल पहुँच गए हैं और जाँच की जा रही है।
नक्सली आतंकी प्रसव से पहले ही इस महिला को आलपरस गाँव में छोड़कर चले गए थे। नक्सलियों ने जहाँ उसे मरने के लिए छोड़ दिया, वहीं पुलिस ने मानवीय चेहरा दिखाते हुए उस महिला नक्सली को अस्पताल में भर्री कराया। अस्पताल में जच्चा-बच्चा दोनों का इलाज जारी है।
शिव सिंह पर यह हमला कॉन्ग्रेस MLA अदिति सिंह के काफिले पर हरचन्दपुर एरिया, लखनऊ-रायबरेली हाइवे पर हुए हमले के कुछ देर बाद हुआ। हालाँकि, पुलिस विभाग का कहना है कि शिव सिंह पर हुए इस हमले का कॉन्ग्रेस MLA पर हुए हमले से कोई सम्बन्ध नहीं है।
मृतक त्यागी को 11 लोगों ने घेर कर मारा था। इस हत्याकांड में आरोपितों के परिवार की 4 महिलाएँ भी शामिल थीं। इस घटना को अंजाम देने के बाद आरोपितों ने मस्जिद में शरण लेनी चाही। चर्चा है कि गाँव वाले किसी भी मुस्लिम को घर किराए पर न देने का निर्णय ले सकते हैं।
गैर-मुस्लिम मर्द के साथ प्रेम करना सलमा को बहुत भारी पड़ा। अपने ही दो भाइयों के जान से मारने की कोशिश (गला घोंटने और एसिड डालने) के बाद वो अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल तो रही है लेकिन बार-बार अपनी अम्मी (माँ) को खोज रही है। वो उस माँ को खोज रही है, जो अस्पताल में अपनी तड़पती बेटी को छोड़कर अचानक से भाग गई।
पीड़िता अनाथ है, उसके माता-पिता नहीं हैं। वह नोएडा में एक किराए के कमरे में रहती है और नौकरी कर अपना जीवन-यापन करती है। सबसे अजीब बात यह है कि लड़की लगातार चिल्लाती रही लेकिन 40 तमाशबीनों में से एक ने भी उसे बचाने की ज़हमत नहीं उठाई।
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती आतंकी मानसिकता वाले शरिया कानून को थोपने की बात कह गईं। चुनावी मौसम में और आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने का इससे बेहतर अवसर (या घिनौना?) शायद उन्हें दुबारा नहीं मिलता।
पढ़िए 1984 सिख दंगों को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह के विचार, उन्हीं के शब्दों में। सुलखान सिंह लिखते हैं कि दंगा वो होता है, जहाँ दोनों तरफ से मारकाट की गई हो लेकिन 1984 में राजीव गाँधी के इशारे पर एकतरफा नरसंहार किया गया था, कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा।
इंटेलिजेंस सेल से मिली ख़ुफ़िया इनपुट्स के बाद पुलिस ने 47 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है, जिसका नाम असकर है। असकर कुछ ही दिनों पहले अरब से लौटा है। वह स्थानीय लोगों से भी ज्यादा वास्ता नहीं रखता था और पड़ोसियों से बातचीत भी नहीं करता था।