गर्मी के चलते मुदस्सिर की दो बेटियाँ बाहर सो रही थीं। लड़कियों को सोता देख महताब और आफ़ताब ने उन पर फब्तियाँ कसनी शुरू कर दीं। विरोध करने पर मारपीट शुरू कर दी। चीख-पुकार सुनकर लड़कियों की माँ बिलिकिस बेगम बीच-बचाव करने आईं लेकिन उन्हें लाठियों से मार-ंमार कर...
"जब मैंने मॉडलिंग शुरू की, तो मैंने देखा लोग कैसे मुझे ट्रीट कर रहे हैं, मुझे अच्छा लग रहा है, जबकि दूसरी ओर मदरसे में मुझे मारा जाता था, मुझे गाली दी जाती थी, मेरे साथ गलत बर्ताव होता था, और मुझे बंधक बनाकर रखा जाता था, सिर्फ़ इसलिए ताकि मैं अल्लाह के बारे में पढ़-सीख सकूँ।"
बच्चों की लड़ाई का मामला शांत होने के बाद किस्मत अली दर्जन भर 'अपने लोगों' के साथ गाँव में पहुँचा। उन्होंने लाठी-डंडे से लैस होकर तिलकराम के घर धावा बोल दिया। जब तिलकराम के परिजनों ने इसका विरोध किया, तब किस्मत अली व उसके लोगों ने सब की पिटाई की।
कंगना ने बताया है कि 2008-09 में वह बांद्रा के एक घर में शिफ्ट हो गई और अपनी बहन के साथ रहने लगी। यहाँ भी पंचोली आने लगा और उनकी बहन को भी प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। पंचोली ने उनकी बहन को परेशान नहीं करने के एवज में एक करोड़ रुपए की माँग की थी।
यह मामला पहला नहीं है और न ही आखिरी, जिस तरह से मुस्लिम महिलाओं को लगातार तीन तलाक़ और हलाला के नाम पर शोषण और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। वह बहुत ज़्यादा भयावह है। तीन तलाक़ बिल प्रक्रिया में है। जल्द ही ऐसे शख्त कानून को अमल में लाने की ज़रूरत है ताकि तमाम पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिल सके।
हाल में तीन तलाक का एक मामला यूपी के सीतापुर से सामने आया था। इस मामले में शराब पीने से मना करने पर नाराज होकर पति ने पत्नी को तीन तलाक दे दिया। इसके बाद पत्नी की बेरहमी से पिटाई की और उसे घर से निकाल दिया।
बात शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की थी हालाँकि, जिन लोगों ने वहाँ भाषण दिया, उनमें से कई के भाषण उत्तेजक थे तो कई ने शांति बनाए रखने की अपील की। मौलवियों ने कहा कि अगर समुदाय वालों की तरह किसी और को निशाना बनाया गया होता तो वे अभी तक पलटवार कर चुके होते।
कॉन्ग्रेस ने सरकार बनने पर तीन तलाक विरोधी बिल समाप्त करने का वादा किया था। लिहाजा, सिंघवी का यह रुख चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा है कि इसी आधार पर यदि देश का हर मुसलमान फैसला करने लगे तो फिर क्या होगा!
निवासियों ने यह भी दावा किया कि इस्लामी भीड़ ने न केवल दुर्गा मंदिर की मूर्तियों को तोड़ा, बल्कि दुर्गा मंदिर में पेशाब भी किया। उन्होंने बताया कि गली के मुहाने पर कई सौ लोगों की भीड़ जमा थी और अगर वे शटर को नीचे नहीं खींचते तो इलाके के हिंदू जरूर मारे जाते।