महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दोषसिद्धि की दर अहम मानी जाती है, क्योंकि इससे पता चलता है कि दर्ज FIR सिर्फ कागजों तक सीमित हैं या असल में वे न्याय तक पहुँच रही हैं।
कोर्ट ने कहा कि घर की चारदीवारी के भीतर आपसी विवाद के दौरान कहे गए जातिसूचक शब्द तब तक अपराध की श्रेणी में नहीं आते, जब तक कि वे 'सार्वजनिक दृष्टि' में न कहे गए हों।