विचार

भारत के सदानंद मास्टर हों या चीन का थियानमेन चौक: वामपंथी छल-बल ने मानवता को दिए हैं बेहिसाब घाव

4 जून 1989 वामपंथी पाखंड का एक नमूना है। उसका इतिहास से लेकर वर्तमान तक, हिंसा और रक्त से ही सना है।

‘हिंदुत्व ठगों’ को धमकी, भगवा व स्वस्तिक का अपमान: जो राकेश पंडिता के हत्यारों की भाषा, लेफ्ट और विपक्ष की वही है बोली

हिंदुत्व को गाली, भगवा ध्वज व स्वस्तिक का अपमान और 'फासिस्ट' शब्द का प्रयोग - आतंकियों की भाषा वही है, जिसका इस्तेमाल भारत का लेफ्ट और कुछ विपक्षी नेता पीएम मोदी को निशाना बनाने के लिए करते हैं।

लोगो में ईसाई धर्म… बात विज्ञान की: 600 साल पहले रचा गया था प्रपंच, महामारी में WHO-IMA बढ़ा रहा उसी को आगे

WHO स्वास्थ्य की दुनिया की सबसे बड़ी संस्था- विज्ञान और तर्कों पर आधारित। लेकिन लोगो में ईसाई देवता... यानी धार्मिक उपनिवेशवाद!

वे डफली अच्छी बजाते हैं, Placard अच्छी लिखते हैं, लेकिन मस्जिद के रेपिस्ट मौलवी पर बोलने की मनाही है

कठुआ में एक रेप हुआ था तो पूरे भारत को तुम लोगों ने रेपिस्तान बताया था। तुम्हें तो याद होगा ही? तुम्हारी ही यूनिवर्सिटी के लोग बॉलीवुड वालों के साथ खुद के हिन्दू होने पर शर्मिंदा हुए थे?

मुस्लिमों के बीच काला लिबास, हिन्दुओं के बीच चंदन लगाना: प्रियंका के बहरूपिया पर विश्वास कर कौन देगा वोट?

उलेमाओं के साथ मीटिंग करके कॉन्ग्रेस अधिक से अधिक किसी संभावित गठबंधन के लिए बार्गेनिंग पावर इकट्ठा करने की कोशिश भले कर सकती है पर...

असम में डॉक्टर पर हमला हो या बंगाल हिंसा, दोनों जनसंख्या जिहाद की उपज: सरकारों के चेतने का समय

प्रश्न यह है कि ऐसे अपराध के बार-बार किए जाने के मूल में क्या जनसंख्या में बदलाव एक मात्र कारण है? जनसंख्या में ऐसा निरंकुश बदलाव, जो असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में देखा गया।

RSS का राहत कार्य ‘हिन्दू राष्ट्र का एजेंडा’ और ‘मुस्लिम बाँट रहे प्यार’: ‘The Wire’ के लिए अब सेवा भी कम्युनल

'The Wire' ने अब समाजसेवा को भी सांप्रदायिक बना दिया है। उसके अनुसार, देश भर में राहत-कार्य करने वाले बुरे हैं और कोई मुस्लिम संस्था चींटी को चीनी भी खिला दे तो वो महान है।

डॉ. सैयद फैजान अहमद, बीमारी इधर है-आप किधर हैं: बंगाल के बुजुर्ग डॉक्टर मुखोपाध्याय हों या असम के सेनापति, हमलावर वही हैं

असम में डॉक्टर पर हमला करने वालों के नाम सामने आने के बाद से इस विवाद में कट्टरपंथी स्वामी रामदेव को घुसेड़ने की कोशिश में लगे हैं।

रक्षा के आत्मनिर्भर मोर्चे पर ‘108 कदम’ और चली मोदी सरकार, UPA जमाने में गोला-बारूद का भी था टोटा

देश दो वर्षों से महामारी की चपेट में है और यह सोचकर ही सिहरन हो जाती है कि अगर गलती से कॉन्ग्रेस और उसके लगुए-भगुए शासन में रहते तो क्या होता?

पीलिया के मरीज को सब पीला दिखता है: द टेलीग्राफ को भी लक्षद्वीप में पेड़ों पर ‘लाल’ नहीं, दिख रहा है ‘भगवा’

हिंदी में कहावत है, पीलिया के मरीज को सब पीला दिखता है। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति को चीजों को वैसी ही देखता है जैसे उसके दिमाग ने पहले से सोचा हुआ है। यही हाल टेलीग्राफ का है।

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