विचार

न तेल, न तेल की धार, फिर यूपी की सियासी खेत में कितना दौड़ेगा ‘किसान आंदोलन’ का ट्रैक्टर

किसान आंदोलन के नेताओं ने एक बार फिर से गोल पोस्ट उठाकर दूसरी जगह रख दिया है। इससे उनका कितना भला हो पाएगा?

बांग्लादेशी अब मजदूरी नहीं रेप करते हैं: असम-बंगाल से निकल ये पूरे देश में फैल गए… लोग NRC पर चर्चा कर रहे

जल्द ही कुछ नहीं किया गया तो जो लोग कल तक केवल बंगाल की राजनीति प्रभावित करते थे, आज बिहार-झारखंड को कर रहे, वही लोग कल...

जेल में चूहा नेहरू के लिए ‘टॉर्चर’, झाड़ू लगा और अंग्रेजी बॉन्ड भर सिर्फ 12 दिन में निकले: सावरकर ने 15 साल झेली प्रताड़ना

नेहरू ने अपनी आत्मकथा में भी नाभा की 'प्रताड़ना' का जिक्र किया है - कमरे की ऊँचाई कम थी, वहाँ एक चूहा था, जमीन पर सोना होता था और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था नहीं थी।

वैश्विक महामारी के दौर में और मजबूती से सामने आया ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का भारतीय दर्शन

कोरोना जैसी वैश्विक महामारी को पराजित किया जा सकता है लेकिन इसके लिए जरूरी है कि हर कोई वसुधैव कुटुम्बकम के दर्शन को आत्मसात करे।

महात्मा गाँधी की हत्या के लिए सजा क्यों नहीं? गोडसे ने कोर्ट को क्या तर्क दिए? मुकदमे से संबंधित दस्तावेज पढ़ने पर रोक क्यों?

जब गोडसे को पूर्वी पंजाब हाईकोर्ट से सजा मिली तो अपने खिलाफ मुक़दमे और दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील का अधिकार क्यों नहीं दिया गया?

बुद्धिजीवी, प्रोपगेंडाजीवी, आन्दोलनजीवी… इकोसिस्टम ने खोले सारे ‘घोड़े’, फिर भी PM मोदी अडिग

कोई राहुल गाँधी इस बात के सहारे नहीं नहीं बैठ सकता कि कोई रवीश कुमार रोज फेसबुक पोस्ट लिखकर उसे सत्ता दिला सकता है। कोई रवीश कुमार इस सोच के सहारे नहीं बैठ सकता कि......

PM मोदी के खिलाफ विदेशी मीडिया गिरोह और उसका प्रोपेगेंडा: कभी ‘डिवाइडर इन चीफ’ तो कभी Covid के ‘एकमात्र जिम्मेदार’

मीडिया गिरोह और भारत के राष्ट्रवादी लोगों का युद्ध बहुत आगे तक चलने वाला है। इस युद्ध में इतना तो निश्चित है कि मीडिया, हिंदुओं और भारत के हितों पर जोरदार प्रहार करने वाला है और उसके सामने खड़े हैं प्रधानमंत्री मोदी और उनका समर्थन करने वाले करोड़ों हिन्दू।

नेताओं में ‘हिन्दू’ दिखने की होड़, क्षेत्रीय क्षत्रपों का PM ख्वाब टूटा: 7 साल में बदल दी पूरी सियासत

PM बनने का ख्वाब देखने वाले क्षेत्रीय क्षत्रप दिल्ली से गायब हो गए। राजनीति डिजिटल हो गया। हर नेता खुद को राष्ट्रवादी और हिन्दू हितैषी दिखाने लगा। कई जानी-दुश्मन एक हो गए। नॉर्थ-ईस्ट और कश्मीर मुख्यधारा की राजनीति में आया।

‘मुझे पता है इसी व्यक्ति ने यह अपराध किया है…’: प्रियदर्शिनी की राह पर तेजपाल का केस, क्या वैसा ही होगा आखिरी फैसला

विस्तृत फैसले में सबूतों को मिटाने की बात से एक सीख सरकार चलाने वालों के लिए भी है। विचार करें कि प्रशासन सरकार के नीचे है या ऊपर?

राजनीति से नहीं ट्विटर के रार का सरोकार, यह ‘विदेशी मसीहा’ को लेकर लिबरल बेचैनी का है इजहार

बात पुराने पापों पर पर्दा डालने की हो या नए प्रोपेगेंडा की, देशी लिबरलों को अब विदेशी मदद की दरकार है, क्योंकि उनके घरेलू नायक बेपर्दा हो चुके हैं।

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