विचार

इन नतीजों के आगे जहाँ और भी हैं… आखिर भाजपा के पास बंगाल में खोने को था ही क्या?

यह टीवी मीडिया और छद्म बुद्धिजीवियों की बनाई दुनिया थी, जिसने भाजपा का सब कुछ बंगाल में दाँव पर बता दिया। भाजपा के पास खोने को था ही क्या?

जिस EVM को जी भर कोसा, आज उससे निकली जीत का जश्न मना रही TMC: बंगाल का वो चुनाव जिसमें CRPF को भी नहीं...

ममता बनर्जी ने कोरोना को बहाना बताया था। बार-बार EVM पर सवाल उठाए थे। आज TMC जीत का जश्न मना रही।

‘बैलेंस’ वाली पॉलिटिक्स से बंगाल में पिछड़ी बीजेपी? असम से सीख सकती है- क्या करें, क्या न करें

असम में अल्पसंख्यक वोट पश्चिम बंगाल से ज्यादा है। फिर भी भाजपा विजय की ओर अग्रसर है, लेकिन बंगाल में वह संघर्ष कर रही है। क्यों?

5 राज्यों के नतीजे अलग-अलग, पर एक सवाल वही- कॉन्ग्रेस का क्या होगा, राहुल गाँधी देंगे और कितने घाव

राज्य बदले। नतीजे बदले। एक चीज जो नहीं बदली, वह है राहुल गाँधी का 'प्रदर्शन'। इसने कॉन्ग्रेस का संकट और गहरा कर दिया है।

शहाबुद्दीन… सब इंस्पेक्टर रामसागर सिंह याद आए, पत्रकार राजदेव रंजन याद आए

शहाबुद्दीन की मौत कोरोना संक्रमण से हुई केवल एक और मौत नहीं है। यह उस डर की मौत है, जो उसके होने से पैदा होता था।

जो खुद पुलिस से भागता-छिपता रहा… आज वो चिदंबरम जनता को बगावत का पाठ पढ़ा रहा: हाय कॉन्ग्रेस, Bye कॉन्ग्रेस

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम ने जनता को सुझाव दिया कि वह मोदी सरकार के विरुद्ध बग़ावत कर दे।

एक संघी की मृत्यु होती है, फिर उसकी फैक्ट-चेकिंग की जाती है… भारतीय मीडिया इससे नीचे नहीं गिर सकती

‘फैक्ट-चेकिंग’ अब फेक न्यूज और प्रोपेगेंडा फैलाने का एक नया माध्यम। मीडिया किसी भी ‘संघी’ अथवा एक प्रखर ‘हिन्दू पहचान’ वाले व्यक्ति को...

बंगाल चुनाव: ममता की एक दशक की गलतियों ने ही लिखी है बीजेपी की जीत की पटकथा!

2011 के चुनावों में लेफ्ट के 34 साल के शासनकाल को खत्म करने वाली ममता बनर्जी ने की कौन-कौन सी गतलियाँ, जो बनी बीजेपी के उभार की वजह

‘मेरे साथ जाहिल गाँव वाले की तरह बात मत करो’: गाँधी होते तो त्रिपुरा के DM साहब से क्या कहते?

कानून लागू करवाना सरकारी अधिकारी की जिम्मेदारी है। पर उसे कैसे लागू करवाना है, इस बात पर अधिकारियों के विवेक और धैर्य की परीक्षा होती है।

कोरोना पर रिपोर्टिंग ही बनी ‘त्रासदी’, संक्रमण से जीतने के जज्बे को मार रही ‘भय’ की ये पत्रकारिता

यह भय का ही असर है जो अस्पताल में बेड पर कब्जा करने के लिए मजबूर कर रहा है। आवश्यकता न होने के बावजूद ऑक्सीजन सिलेंडर और इंजेक्शन रखने के लिए उकसा रहा है।

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