विचार

मोदी से घृणा के लिए वे क्या कम हैं जो आप भी उसी जाल में उलझ रहे: नैरेटिव निर्माण की वामपंथी चाल को समझिए

सच यही है कि कपटी कम्युनिस्टों ने हमेशा इस देश को बाँटने का काम किया है। तोड़ने का काम किया है। झूठ को, कोरे-सफेद झूठ को स्थापित किया है।

टिकरी बॉर्डर पर गैंगरेप: ‘क्रांति’ की जगह किसान आंदोलन से ‘अपराध’ की डिलिवरी, आगे क्या…

कथित आंदोलन अब किस अपराध की खोज में निकलेगा, इसका उत्तर शायद टिकरी बॉर्डर पर रुके समय के पास है।

गैर बीजेपी मुख्यमंत्रियों की ‘हरकतों’ में मोदी विरोध का ‘हीरो’ तलाशता इकोसिस्टम: संघीय ढाँचे में राजनीतिक परंपराओं की ये कैसी नींव?

ममता बनर्जी हों या हेमंत सोरेन या फिर अरविंद केजरीवाल... प्रश्न उठता है कि भारत के संघीय ढाँचे में कैसी राजनीतिक परंपराओं की नींव रखी जा रही है?

हिन्दुओ… इस आदेश को रट लो, क्योंकि यह केवल एक गाँव-एक प्रांत की समस्या नहीं

ऐसे हालात में अमूमन हिंदू मन मसोस रह जाते हैं। अब इससे इतर मद्रास हाई कोर्ट ने एक रास्ता दिखाया है।

लेफ्ट मीडिया नैरेटिव के आधार पर लैंसेट ने PM मोदी को बदनाम करने के लिए प्रकाशित किया ‘प्रोपेगेंडा’ लेख, खुली पोल

मेडिकल क्षेत्र के जर्नल लैंसेट ने शनिवार को एक लेख प्रकाशित किया जहाँ भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते संक्रमण का पूरा ठीकरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फोड़ दिया गया।

हिंसा वही जो पिया मन भाए?

"जो है उसमें से अपने मतलब का सीन ही देखना है" से चलकर "कुछ नहीं दिख रहा है" - यही है वाम-तंत्री रिपोर्टिंग का क्रमिक विकास।

यूपी पर स्विच ऑन, बंगाल हिंसा पर स्विच ऑफ: मेनस्ट्रीम मीडिया का ये संतुलन क्या कहलाता है

मीडिया भय, लालच, स्वार्थ या मोह के कारण सच न दिखाए तो लोकतंत्र कैसे ज़िंदा रहेगा? क्या बंगाल को लेकर ऐसा ही नहीं हो रहा?

‘द वायर’ हो या ‘स्क्रॉल’, बंगाल में TMC की हिंसा पर ममता की निंदा की जगह इसे जायज ठहराने में व्यस्त है लिबरल मीडिया

'द वायर' ने बंगाल में हो रही हिंसा की न तो निंदा की है और न ही उसे गलत बताया है। इसका सारा जोर भाजपा द्वारा इसे सांप्रदायिक बताए जाने के आरोपों पर है।

‘लोगों की मदद के लिए मठ की ज़मीन भी बेच देंगे’: महामारी का वो दौर जब स्वामी विवेकानंद ने की थी लोगों की मदद

इस दौर में हमें मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक रूप से मजबूत करने के लिए कुछ ऐसा चाहिए जिसे हम इन परिस्थितयों से जोड़ कर भी देख सके और वह हमें हर रूप से मजबूत भी करे।

बांग्ला-बंगाली देश से ऊपर, बाकी सब बेकार: ममता की लगाई ‘उप-राष्ट्रवादी खेला’ से जलेंगे और राज्य भी

सफलता के इस शोर में एक महत्वपूर्ण कारण पर चर्चा शायद न हो और वह कारण है बांग्ला उप राष्ट्रवाद। अब इसे प्रशांत किशोर द्वारा बनाई गई रणनीति का हिस्सा माने या फिर पहले से चली आ रही एक सोच!

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें