विचार

शहाबुद्दीन… सब इंस्पेक्टर रामसागर सिंह याद आए, पत्रकार राजदेव रंजन याद आए

शहाबुद्दीन की मौत कोरोना संक्रमण से हुई केवल एक और मौत नहीं है। यह उस डर की मौत है, जो उसके होने से पैदा होता था।

जो खुद पुलिस से भागता-छिपता रहा… आज वो चिदंबरम जनता को बगावत का पाठ पढ़ा रहा: हाय कॉन्ग्रेस, Bye कॉन्ग्रेस

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम ने जनता को सुझाव दिया कि वह मोदी सरकार के विरुद्ध बग़ावत कर दे।

एक संघी की मृत्यु होती है, फिर उसकी फैक्ट-चेकिंग की जाती है… भारतीय मीडिया इससे नीचे नहीं गिर सकती

‘फैक्ट-चेकिंग’ अब फेक न्यूज और प्रोपेगेंडा फैलाने का एक नया माध्यम। मीडिया किसी भी ‘संघी’ अथवा एक प्रखर ‘हिन्दू पहचान’ वाले व्यक्ति को...

बंगाल चुनाव: ममता की एक दशक की गलतियों ने ही लिखी है बीजेपी की जीत की पटकथा!

2011 के चुनावों में लेफ्ट के 34 साल के शासनकाल को खत्म करने वाली ममता बनर्जी ने की कौन-कौन सी गतलियाँ, जो बनी बीजेपी के उभार की वजह

‘मेरे साथ जाहिल गाँव वाले की तरह बात मत करो’: गाँधी होते तो त्रिपुरा के DM साहब से क्या कहते?

कानून लागू करवाना सरकारी अधिकारी की जिम्मेदारी है। पर उसे कैसे लागू करवाना है, इस बात पर अधिकारियों के विवेक और धैर्य की परीक्षा होती है।

कोरोना पर रिपोर्टिंग ही बनी ‘त्रासदी’, संक्रमण से जीतने के जज्बे को मार रही ‘भय’ की ये पत्रकारिता

यह भय का ही असर है जो अस्पताल में बेड पर कब्जा करने के लिए मजबूर कर रहा है। आवश्यकता न होने के बावजूद ऑक्सीजन सिलेंडर और इंजेक्शन रखने के लिए उकसा रहा है।

भारत पर ‘गोरी मीडिया’ की शाब्दिक उल्टीः पोखरण हो या मंगलयान या फिर कुम्भ और कोरोना, परोसा बस प्रोपेगेंडा

‘वाशिंगटन पोस्ट’ की खबर हो या 'गार्डियन' का संपादकीय, ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ का कवरेज हो या ‘सीएनएन’ की कवरेज, ये सभी बस 'व्हाइट मेन्स बर्डन सिंड्रोम' का ज्वलंत उदाहरण है।

‘चु@$ औरत’: पूछा- कोरोना संकट में गाँधी परिवार ने कितनी मदद की, बदले में मिली गालियाँ-मौत की दुआ

सवाल बस इतना था कि क्या गाँधी परिवार ने अस्थायी क्वारंटाइन सेंटर्स, अस्पताल, ऑक्सीजन प्लांट्स बनवाने या प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन की व्यवस्था करने में कोई योगदान दिया है?

संक्रमण काल की राजनीति में निचले पायदान पर उतरी कॉन्ग्रेस: झूठ, अफवाह, फेक न्यूज़ बना हथियार

जबसे टीकाकरण के तृतीय चरण की घोषणा हुई है तब से बहस और अफवाहों का बाजार फिर से गर्म है। अब कॉन्ग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने टीकाकरण के तृतीय चरण के अभियान में अपने राज्यों की भागीदारी से इंकार कर दिया है।

3 घंटे तक तड़पी शोएब-पांडे-पटेल की माँ, नोएडा में मर गए सबके नाना: कोरोना से भी भयंकर है यह ‘महामारी’

स्वाति के नानाजी के देहांत की खबर जैसे ही फैली हिटलर, कल्पना मीना और वेंकट आर के नानाजी लोग भी नोएडा के उसी अस्पताल में पहुँचे ताकि...

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