विचार

भारत पर ‘गोरी मीडिया’ की शाब्दिक उल्टीः पोखरण हो या मंगलयान या फिर कुम्भ और कोरोना, परोसा बस प्रोपेगेंडा

‘वाशिंगटन पोस्ट’ की खबर हो या 'गार्डियन' का संपादकीय, ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ का कवरेज हो या ‘सीएनएन’ की कवरेज, ये सभी बस 'व्हाइट मेन्स बर्डन सिंड्रोम' का ज्वलंत उदाहरण है।

‘चु@$ औरत’: पूछा- कोरोना संकट में गाँधी परिवार ने कितनी मदद की, बदले में मिली गालियाँ-मौत की दुआ

सवाल बस इतना था कि क्या गाँधी परिवार ने अस्थायी क्वारंटाइन सेंटर्स, अस्पताल, ऑक्सीजन प्लांट्स बनवाने या प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन की व्यवस्था करने में कोई योगदान दिया है?

संक्रमण काल की राजनीति में निचले पायदान पर उतरी कॉन्ग्रेस: झूठ, अफवाह, फेक न्यूज़ बना हथियार

जबसे टीकाकरण के तृतीय चरण की घोषणा हुई है तब से बहस और अफवाहों का बाजार फिर से गर्म है। अब कॉन्ग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने टीकाकरण के तृतीय चरण के अभियान में अपने राज्यों की भागीदारी से इंकार कर दिया है।

3 घंटे तक तड़पी शोएब-पांडे-पटेल की माँ, नोएडा में मर गए सबके नाना: कोरोना से भी भयंकर है यह ‘महामारी’

स्वाति के नानाजी के देहांत की खबर जैसे ही फैली हिटलर, कल्पना मीना और वेंकट आर के नानाजी लोग भी नोएडा के उसी अस्पताल में पहुँचे ताकि...

विरार हो या भंडारा, सवाल वहीः कब तक जड़ता को मुंबई स्पिरिट या दिलेर दिल्ली बता मन बहलाते रहेंगे

COVID-19 की दूसरी लहर बहुत तेज है और अधिकतर राज्यों में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। पर ऐसा क्यों है कि महाराष्ट्र सरकार के संक्रमण रोकने के प्रयास शुरू से ही असफल दिखाई देते रहे हैं?

4 घंटे का ऑक्सीजन बचा है, 44 घंटों का क्यों नहीं? क्यों अंत में ही जागता है अस्पताल और राज्य सरकारों का तंत्र?

"केंद्र सरकार ने कोरोना की दूसरी लहर को लेकर राज्यों को आगाह नहीं किया। यदि आगाह कर देते तो हम तैयार रहते।" - बेचारे CM साब...

ऑक्सीजन प्लांट लगा रहा श्रीराम मंदिर ट्रस्ट: मंदिरों के रुपयों का हिसाब माँगने वाले गायब, मस्जिद से पत्थरबाजी पर चुप्पी

'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' ट्रस्ट कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए आगे आया। दशरथ मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन प्लांट...

राहुल गाँधी की फ़ॉर्म्युला पॉलिटिक्स और उसमें फँसी कॉन्ग्रेस: प्रधानमंत्री बनने/बनाने की ख्वाहिश कब तक?

डेढ़ वर्षों तक कड़ी मेहनत के बाद राहुल गाँधी ने एक और उद्योगपति की खोज कर ली है, जिसे वे मोदी का मित्र बता सकें। ऐसा करके वो...

मतुआ समुदाय, चिकेन्स नेक और बांग्लादेश से लगे इलाके: छठे चरण में कौन से फैक्टर करेंगे काम, BJP से लोगों को हैं उम्मीदें

पश्चिम बंगाल की जनता उद्योग चाहती है, जो उसके हिसाब से सिर्फ भाजपा ही दे सकती है। बेरोजगारी मुद्दा है। घुसपैठ और मुस्लिम तुष्टिकरण पर TMC कोई जवाब नहीं दे पाई है।

हम 1 साल में कितने तैयार हुए? सरकारों की नाकामी के बाद आखिर किस अवतार की बाट जोह रहे हम?

मुफ्त वाई-फाई, मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी से आगे लोगों को सोचने लायक ही नहीं छोड़ती समाजवाद। सरकार के भरोसे हाथ बाँध कर...

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