विचार

JNU का वो काला दिन, जब वामपंथियों के डर से मिटाने पड़े थे स्वास्तिक और शुभ दीपावली के निशान

"यहाँ सिर्फ एक ही सत्ता है... वामपंथी तानाशाही सत्ता! जिस पर खतरा आते ही हिंसा का बर्बर रूप सामने आ जाता है। ABVP को गुंडा कहने वाले..."

मुनव्वर फारूकी जैसी ‘कॉमेडी कौम’ के बीच नए हिन्दू का असहिष्णु होना कितना आवश्यक है?

आज का हिन्दू सामाजिक रूप से पूरी तरह से टूट चुका है। वह केवल चिड़चिड़ा या डरा हुआ नहीं है, बल्कि एक अँधेरे नैराश्य के काले सागर में गोते लगा रहा है।

सतपाल निश्चल की हत्या का पाकिस्तान ही जिम्मेदार नहीं, भारत का ​सेक्युलर-लिबरल पॉलिटिक्स भी दोषी

जम्मू-कश्मीर में बीते दिनों आतंकवादियों ने सतपाल निश्चल की गोली मार कर हत्या कर दी। उन्हें हाल ही में डोमिसाइल सर्टिफिकेट मिला था।

मुनव्वर फारूकी अगर ‘शार्ली एब्दो’ होता तो उसकी गर्दन नीचे पड़ी होती… लटर-पटर बंद करो लिबरलों

लिबरलों द्वारा मुनव्वर फारूकी की गिरफ्तारी की शार्ली एब्दो नरसंहार से तुलना करना, बताता है कि इनके तर्क कितने वाहियात हैं।

देवी-देवताओं को कोई मुनव्वर गाली दे तो चुप रहें, वरना भास्कर गुंडा कहेगा

'भास्कर' चाहता है कि देवी-देवताओं को गाली देना कोई 'मुनव्वर' अपना करियर ऑप्शन बना ले और आप सुनते रहें। विरोध नहीं करें। ऐसा करेंगे तो यह गुंडई होगी।

ऑपइंडिया के पाठकों के नाम सम्पादक का पत्र: आशा है 2021, 2020 जैसा न हो!

ऑपइंडिया सिर्फ पत्रकारिता नहीं है, यह एक मुहिम है जो सनातन आस्था की प्रतिरक्षा के लिए है। यह सिर्फ रिपोर्टिंग का काम नहीं है, बल्कि वामपंथियों के कैंसरकारी नैरेटिव को काटने के लिए अपना नैरेटिव बनाने का काम है।

वाकई मुसलमान भारत में अल्पसंख्यक हैं, अलग-थलग हैं?

शेखर गुप्ता अकेले नहीं हैं। राजदीप से लेकर रवीश कुमार तक एक हरी-भरी जमात है, जिसके लिए अल्पसंख्यक की बातों का मतलब मुस्लिमपरस्ती है।

दिल्ली पुलिस पर रिवॉल्वर तानने वाले शाहरुख को भूली कॉन्ग्रेस, जामिया फायरिंग के नाबालिग को ‘उग्र दक्षिणपंथी’ बता दिखाया

कॉन्ग्रेस को शाहरुख याद नहीं है। लेकिन, जामिया में गोली चलाने वाले नाबालिग का चेहरा दिखाने से उसे गुरेज नहीं। क्यों? सिर्फ इसलिए कि वह नाबालिग एक हिंदू था।

सिखों की लाश पर PM बने, मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए हदें पार की: कॉन्ग्रेस का ‘मिस्टर क्लीन’… लेकिन कहे गए ‘बोफोर्स चोर’

भारत में अगर किसी पार्टी को कभी सबसे ज्यादा सीटें मिलीं तो वो थी 1984 में कॉन्ग्रेस को मिली 414 सीट। इसके बाद राजीव गाँधी प्रधानमंत्री बने।

बुलेट का जवाब बैलेट से: जम्मू-कश्मीर में भारत, भारतीयों और लोकतंत्र की जीत, भाजपा का उदय है बड़ा संदेश

सन 2021 की ‘पूर्वसंध्या’ में आए ये चुनाव परिणाम बहुत कुछ कहते हैं और आगामी विधानसभा चुनावों की पूर्वपीठिका निर्मित करते हैं।

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