Wednesday, July 15, 2020
Home रिपोर्ट मीडिया अमेरिका में बैठ भारतीय युवाओं को भड़काने वाले रवीश जी, मॉलिक्यूल नाक की जगह...

अमेरिका में बैठ भारतीय युवाओं को भड़काने वाले रवीश जी, मॉलिक्यूल नाक की जगह कहीं और भी धँस सकता है

रवीश कुमार यूपी-बिहार के लोगों की समझ को 'थर्ड क्लास' बताते हैं। युवाओं को हिंसा के लिए भड़काते हैं। ऐसे में जरूरी है कि एक रिसर्च पेपर इस पर भी निकलना चाहिए कि कैलिफोर्निया में बैठ कर वे जिस मॉलिक्यूल का अविष्कार करने में लगे हैं, वो उनके शरीर में कहाँ पर धँसेगा और कहाँ से अलार्म बजाएगा।

ये भी पढ़ें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार का अंतिम सहारा अब सड़क पर उतर कर होने वाला विरोध-प्रदर्शन ही रह गया है। अगर आप सोच रहे हैं कि रवीश डफली बजाते हुए सड़क पर लाल झंडा लिए उतरने की योजना बना रहे हैं, तो शायद आप उनकी घाघ-बुद्धि से परिचित नहीं हैं। वो भला ख़ुद क्यों सड़क पर आएँ? इसमें उनका घाटा है। सरकार का क्या जाता है? इसलिए, उनके धूर्त दिमाग ने नई योजना तैयार की है। क्यों न युवाओं, ख़ासकर छात्रों को ही भड़का कर सड़क पर उतार दिया जाए। साँप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी। एनडीटीवी की टीआरपी पाताल में धँसते जा रही है और रवीश नाक में धँसने वाला मॉलिक्यूल बनाने की बात कर रहे हैं। उनका मीडिया संस्थान कंगाल होने की ओर अग्रसर है और वो युवाओं को बौद्धिक रूप से कंगाल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

अफवाह ऐसे फैलाई जा रही है, जैसे लगता हो कि जेएनयू की फी काफ़ी महँगी है। जबकि देखा जाए तो विश्वविद्यालय ने सालाना 240 रुपए के ट्यूशन या 9 रुपए के लाइब्रेरी फी में कोई बदलाव नहीं किया है। बस हॉस्टल मैनुअल अपडेट हुआ है। जिन सेवाओं का छात्र इस्तेमाल करेंगे, उनका शुल्क देना होगा। शुल्क कम देना है, कम बिजली पानी यूज कीजिए। 10 रुपए से 300 रुपए हुए मासिक हॉस्टल फी को 3000% की वृद्धि बता कर प्रचारित किया जा रहा है। क्या ये भ्रामक नहीं? इससे जेएनयू महँगा तो नहीं हो जाता। उसकी तुलना उसके इर्द-गिर्द स्थित आईआईटी और आईआईएमसी से न ही करें तो बेहतर।

मुफ्त शिक्षा के लिए बजट कहाँ से आएगा? सरकार ने 12वीं तक की शिक्षा पहले ही मुफ़्त कर रखी है। जर्मनी और नॉर्वे जैसे देशों में उच्च-शिक्षा काफ़ी सस्ती है, लेकिन उसकी जनसंख्या से ज्यादा लोग तो बिहार के कई जिलों में रहते हैं। 130 करोड़ लोगों के देश में सभी के लिए मुफ्त शिक्षा की बात ही बेमानी है, जहाँ की जीडीपी अपना राजस्व घाटा कम करने के लिए संघर्ष कर रही हो। जेएनयू के आंदोलन के पीछे राजनीति हो रही है, इसमें कोई शक नहीं। सत्ता में अस्थिरता फैलाने की मंशा रखने वाले वामपंथी इस पर जवाब देंगे कि चीन की वामपंथी सरकार ने हॉन्गकॉन्ग के छात्रों के साथ कैसा व्यवहार किया है?

दरअसल, रवीश ने एक लेख लिखा। इसमें उन्होंने युवाओं को सड़क पर उतर कर अराजकता फैलाने की अपील की। भले ही उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से ऐसा किया लेकिन उनकी मोदी-विरोधी मंशा हिलोरे मारते हुए अपना प्रत्यक्ष परिचय दे रही थी। रवीश ने हिंदी पट्टी के नौजवानों को अभिशप्त करार दिया। उन्होंने हिंदी बेल्ट के युवाओं की राजनीतिक समझ पर सवाल खड़े किए। रवीश ने कहा कि यहाँ के युवाओं की राजनीतिक समझ थर्ड क्लास की है। वो कहते हैं कि थर्ड क्लास न होती तो वो भी जेएनयू वालों की तरह ही सड़क पर होते।

क्या रवीश चाहते हैं कि यूपी-बिहार के युवा भी अपने कॉलेज के किसी डीन को घेर कर दुर्व्यवहार करें, जिससे वो वहीं अचेत होकर गिर पड़े? उसकी बीवी और बच्ची गिड़गिड़ाते रहें, क्योंकि बीमार डीन को जल्दी अस्पताल पहुँचाना है और छात्र नारेबाजी करते हुए एम्बुलेंस को घेर कर खड़े हो जाएँ? जी हाँ, ऐसा जेएनयू में हुआ, जब प्रोफेसर उमेश कदम मरते-मरते बचे। क्या रवीश चाहते हैं कि हिंदी पट्टी की छात्राएँ भी अपने कॉलेज की किसी महिला प्रोफेसर के कपड़े फाड़ने का प्रयास करे? ऐसा जेएनयू में हुआ। उन्हीं छात्रों ने किया, एक हाथ में जो महिलाधिकार का झंडा और दूसरे हाथ में कैंडल लिए आए दिन सड़कों पर निकलती हैं।

हिन्दी प्रदेश को अभिशप्त नौजवानों जे एन यू से कुछ सीखो,क्या चुप ही रहोगे ? जे एन यू को ख़त्म किया जा रहा है ताकि…

Posted by Ravish Kumar on Monday, November 18, 2019
युवाओं को भड़काते हुए रवीश कुमार का फेसबुक पोस्ट

कहीं रवीश की इच्छा ये तो नहीं कि बिहार के छात्र संगठनों में वामपंथ काबिज हो जाए और नेता झूठी अफवाह फैलाएँ कि कैम्पस में सीआरपीएफ तैनात कर छात्रों को पिटवाया जा रहा है। जेएनयू के छात्र नेता साकेत मून ने कुछ ऐसा ही किया। आवाज़ उठाने और सड़क पर उतरने के लिए युवाओं को जेएनयू से सीखने की सलाह देने वाले रवीश कहीं ऐसा तो नहीं चाहते कि यूपी-बिहार के कॉलेजों में भी महिला पत्रकारों के साथ बदतमीजी की जाए और उनके ‘मजे लेने’ की बात कही जाए। महिला मीडियाकर्मियों को घेर कर गुंडागर्दी करने का काम जेएनयू के उपद्रवी कर चुके हैं।

आखिर पढ़ने के लिए राजनीति करना अनिवार्य क्यों है? राजनीति की समझ होना, राजनीतिक चर्चा करना और सड़क पर उतर कर राजनीति करना अलग-अलग चीजें हैं। जब रवीश कहते हैं कि हिन्दू पट्टी के युवा चुप हैं, तब क्या वो उन्हें अराजकता फैलाते हुए जेएनयू के उपद्रवियों की तरह पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ कर क़ानून-व्यवस्था की ऐसी-तैसे करने को नहीं भड़का रहे? क्या रवीश कुमार जवाब देंगे कि सोमवार (नवंबर 18, 2019) को दिल्ली में उद्योग भवन, लोक कल्याण मार्ग, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और पटेल चौक मेट्रो स्टेशनों पर सेवाओं को ठप्प क्यों किया गया था? इससे कितने लोगों को परेशानी हुई, इसका कोई हिसाब नहीं। उस दिल्ली में ऐसा हुआ, जहाँ मेट्रो को सिटी की लाइफलाइन कहा जाता है।

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी भी तो इसी देश का हिस्सा है। वहाँ के छात्र भी तो युवा ही हैं। वो अपने ही विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना मदन मोहन मालवीय के मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके बारे में रवीश ने कभी लिखा क्या? बीएचयू में महमना का नियम चलेगा या फिर किसी वामपंथी वीसी की मनमानी? अगर ऐसा है तो वहाँ शिलापट्टों पर लिखे महामना के विचारों को उसी स्प्रे पेंट्स से मिटा देना चाहिए, जिसका प्रयोग कर के विवेकानंद को अपमानित किया गया था। और हाँ, उस स्प्रे पेंट की कीमत जेएनयू के कई छात्रों के हॉस्टल फी से ज्यादा होती है।

लेकिन, रवीश कुमार बीएचयू पर नहीं लिखेंगे। वे कैलिफोर्निया से अराजकता भड़काने की मीठी गोली फेंकेंगे। उन्होंने मंगलवार को ख़ुद बताया कि वो फ़िलहाल कैलिफोर्निया के कॉलेज ऑफ केमिस्ट्री में घूम रहे हैं। मज़ाकिया अंदाज़ में उन्होंने लिखा कि वो एक ऐसा मॉलिक्यूल बना रहे हैं, जो कम्युनल/ फेक टेक्स्ट के साथ अपने आप चिपक जाएगा। हालाँकि, उन्होंने ये नहीं बताया कि ये मॉलिक्यूल झूठ बोल कर और भ्रामक बातें कर के युवाओं को अराजकता फैलाने के लिए भड़काने वालों के कहाँ जाकर चिपकेगा? रवीश ने लिखा कि जैसे ही कोई कम्युनल टेक्स्ट पढ़ेगा, उसकी नाक से होते हुए मॉलिक्यूल दिमाग़ में अलार्म बजाने लगेगा।

अगर सच में ऐसा है तो रवीश को इस मॉलिक्यूल का प्रयोग ख़ुद पर तो कभी नहीं करना चाहिए। वरना वो डूबते चैनल एनडीटीवी के लो-टीआरपी शो ‘प्राइम टाइम’ में बैठेंगे तो उनके रुदन की जगह जनता को एक घंटे तक अलार्म की आवाज़ ही सुनने मिलेगी। दावा तो उन्होंने ये किया है कि ये अलार्म दिमाग में बजेगा लेकिन रवीश के मामले में कहाँ से आवाज़ निकलेगी, इस पर वो फ़िलहाल चुप हैं। राज्यसभा का 250वाँ सत्र चल रहा है। ऐसे में रवीश चाहते हैं कि इस ऐतिहासिक मौके पर कुछ ऐसा हो, जिससे जनता का ध्यान वहाँ से हट कर कहीं और चला जाए। सड़कों पर ख़ून बहे और अराजकता फैले।

ये भी पढ़ें: पत्रकारिता के अंतिम पैगंबर रवीश जी के अंतरात्मा की आवाज: सुप्रीम कोर्ट बेवफा है!
ये भी पढ़ें: ख़ुद में ‘ढुका लाग के’ देखिए रवीश जी, दूसरों को ‘लबरा’ बता कर नेतागिरी करना बंद कर देंगे

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

ख़ास ख़बरें

गहलोत ने की राहुल गाँधी के खिलाफ गैंगबाजी, 26 सीटों पर समेटा पार्टी को: सचिन पायलट ने कहा – ‘मैं अभी भी कॉन्ग्रेसी’

"200 सदस्यीय विधानसभा में जब कॉन्ग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई, तब मैंने पार्टी की कमान संभाली। मैं जमीन पर मेहनत करता रहा और गहलोत तब चुप थे।"

कामराज प्लान: कॉन्ग्रेस के लिए दवा या फिर पायलट-सिंधिया जैसों को ठिकाने लगाने का फॉर्मूला?

कामराज प्लान। क्या यह राजनीतिक दल को मजबूत करने वाली संजीवनी बूटी है? या फिर कॉन्ग्रेस को परिवार की बपौती बनाने वाली खुराक?

₹9 लाख अस्पताल में रहने की कीमत : बेंगलुरु में बिल सुनते भागा कोरोना संदिग्ध, नहीं हुआ एडमिट

एक मरीज को कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल ने 9.09 लाख रुपए का संभावित बिल थमा दिया। जबकि उन्हें कोरोना नहीं था, वो सिर्फ कोरोना संदिग्ध थे।

विदेश में पढ़ाई के दौरान मोहब्बत, पहले मजहब फिर सारा के CM पिता फारूक अब्दुल्ला बने रोड़ा: सचिन पायलट की लव स्टोरी

सारा और सचिन पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के दौरान एक दूसरे से मिले थे। एक दूसरे को डेट करने के बाद, दोनों ने सारा के परिवार की तरफ से लगातार आपत्तियों के बावजूद 2004 में एक बंधन में बँधने का फैसला किया।

केजरीवाल शिक्षा मॉडल: ‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ के सिद्धांत की भेंट चढ़ते छात्रों का भविष्य चर्चा में क्यों नहीं आता

आँकड़े बताते है कि वर्ष 2008-2015 तक दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का परीक्षा परिणाम कभी भी 85% से कम नही हुआ। लेकिन राजनीतिक लाभ और मीडिया मैनेजमेंट के लिए बच्चों को आक्रामक रूप से 9वीं और 11वीं में रोक दिया जाना कितना उचित है?

दूध बेचने से लेकर हॉलैंड में F-16 उड़ाने तक: किस्सा राजेश पायलट का, जिसने सत्ता के सबसे बड़े दलाल को जेल भेजा

सत्ता के सबसे बड़े दलाल पर हाथ डालने के 2 दिन बाद ही पायलट को गृह मंत्रालय से निकाल बाहर किया गया था। जानिए राजेश्वर प्रसाद कैसे बने राजेश पायलट।

प्रचलित ख़बरें

‘लॉकडाउन के बाद इंशाअल्लाह आपको पीतल का हिजाब पहनाया जाएगा’: AMU की छात्रा का उत्पीड़न

AMU की एक छात्रा ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि रहबर दानिश और उसके साथी उसका उत्पीड़न कर रहे। उसे धमकी दे रहे।

टीवी और मिक्सर ग्राइंडर के कचरे से ‘ड्रोन बॉय’ प्रताप एनएम ने बनाए 600 ड्रोन: फैक्ट चेक में खुली पोल

इन्टरनेट यूजर्स ऐसी कहानियाँ साझा कर रहे हैं कि कैसे प्रताप ने दुनिया भर के विभिन्न ड्रोन एक्सपो में कई स्वर्ण पदक जीते हैं, 87 देशों द्वारा उसे आमंत्रित किया गया है, और अब पीएम मोदी के साथ ही डीआरडीपी से उन्हें काम पर रखने के लिए कहा गया है।

‘मुझे बचा लो… बॉयफ्रेंड हबीब मुझे मार डालेगा’: रिदा चौधरी का आखिरी कॉल, फर्श पर पड़ी मिली लाश

आरोप है कि हत्या के बाद हबीब ने रिदा के शव को पंखे से लटका कर इसे आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया। गुरुग्राम पुलिस जाँच कर रही है।

कट्टर मुस्लिम किसी के बाप से नहीं डरता: अजान की आवाज कम करने की बात पर फरदीन ने रेप की धमकी दी

ये तस्वीर रीमा (बदला हुआ नाम) ने ट्विटर पर 28 जून को शेयर की थी। इसके बाद सुहेल खान ने भी रीमा के साथ अभद्रता से बात की थी।

मैं हिंदुओं को सबक सिखाना चाहता था, दंगों से पहले तुड़वा दिए थे सारे कैमरे: ताहिर हुसैन का कबूलनामा

8वीं तक पढ़ा ताहिर हुसैन 1993 में अपने पिता के साथ दिल्ली आया था और दोनों पिता-पुत्र बढ़ई का काम करते थे। पढ़ें दिल्ली दंगों पर उसका कबूलनामा।

विदेश में पढ़ाई के दौरान मोहब्बत, पहले मजहब फिर सारा के CM पिता फारूक अब्दुल्ला बने रोड़ा: सचिन पायलट की लव स्टोरी

सारा और सचिन पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के दौरान एक दूसरे से मिले थे। एक दूसरे को डेट करने के बाद, दोनों ने सारा के परिवार की तरफ से लगातार आपत्तियों के बावजूद 2004 में एक बंधन में बँधने का फैसला किया।

गहलोत ने की राहुल गाँधी के खिलाफ गैंगबाजी, 26 सीटों पर समेटा पार्टी को: सचिन पायलट ने कहा – ‘मैं अभी भी कॉन्ग्रेसी’

"200 सदस्यीय विधानसभा में जब कॉन्ग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई, तब मैंने पार्टी की कमान संभाली। मैं जमीन पर मेहनत करता रहा और गहलोत तब चुप थे।"

कामराज प्लान: कॉन्ग्रेस के लिए दवा या फिर पायलट-सिंधिया जैसों को ठिकाने लगाने का फॉर्मूला?

कामराज प्लान। क्या यह राजनीतिक दल को मजबूत करने वाली संजीवनी बूटी है? या फिर कॉन्ग्रेस को परिवार की बपौती बनाने वाली खुराक?

₹9 लाख अस्पताल में रहने की कीमत : बेंगलुरु में बिल सुनते भागा कोरोना संदिग्ध, नहीं हुआ एडमिट

एक मरीज को कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल ने 9.09 लाख रुपए का संभावित बिल थमा दिया। जबकि उन्हें कोरोना नहीं था, वो सिर्फ कोरोना संदिग्ध थे।

Covid-19: भारत में अब तक 23727 की मौत, 311565 सक्रिय मामले, आधे से अधिक संक्रमित महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली में

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में देशभर में 28,498 नए मामले सामने आए हैं और 553 लोगों की कोरोना वायरस के कारण मौत हुई है।

विदेश में पढ़ाई के दौरान मोहब्बत, पहले मजहब फिर सारा के CM पिता फारूक अब्दुल्ला बने रोड़ा: सचिन पायलट की लव स्टोरी

सारा और सचिन पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के दौरान एक दूसरे से मिले थे। एक दूसरे को डेट करने के बाद, दोनों ने सारा के परिवार की तरफ से लगातार आपत्तियों के बावजूद 2004 में एक बंधन में बँधने का फैसला किया।

फ्रांस के पिघलते ग्लेशियर से मिले 1966 के भारतीय अखबार, इंदिरा गाँधी की जीत का है जिक्र

पश्चिमी यूरोप में मोंट ब्लैंक पर्वत श्रृंखला पर पिघलते फ्रांसीसी बोसन्स ग्लेशियरों से 1966 में इंदिरा गाँधी की चुनावी विजय की सुर्खियों वाले भारतीय अखबार बरामद हुए हैं।

नेपाल में हिंदुओं ने जलाया इमरान खान का पुतला: पाक में मंदिर निर्माण रोके जाने और हिंदू समुदाय के उत्पीड़न का किया विरोध

"पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यक अभी भी सरकार द्वारा प्रताड़ित किए जा रहे हैं। सरकार हिंदू मंदिरों और मठों के निर्माण की अनुमति नहीं देकर एक और बड़ा अपराध कर रही है।"

केजरीवाल शिक्षा मॉडल: ‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ के सिद्धांत की भेंट चढ़ते छात्रों का भविष्य चर्चा में क्यों नहीं आता

आँकड़े बताते है कि वर्ष 2008-2015 तक दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का परीक्षा परिणाम कभी भी 85% से कम नही हुआ। लेकिन राजनीतिक लाभ और मीडिया मैनेजमेंट के लिए बच्चों को आक्रामक रूप से 9वीं और 11वीं में रोक दिया जाना कितना उचित है?

‘अगर यहाँ एक भी मंदिर बना तो मैं सबसे पहले सुसाइड जैकेट पहन कर उस पर हमला करूँगा’: पाकिस्तानी शख्स का वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक पाकिस्तान में मंदिर बनाने या बुतपरस्ती करने पर उसे खुद बम से उड़ाने की बात कहते हुए देखा जा सकता है।

विकास दुबे के गुर्गे शशिकांत की पत्नी का ऑडियो: सुनिए फोन पर रिश्तेदार को बता रही पूरी घटना, छीने गए हथियार बरामद

कानपुर कांड में पकड़े गए शशिकांत की पत्नी का ऑडियो वायरल हो रहा हैं। ऑडियो में शशिकांत की पत्नी रिश्तेदार को फोन करके पूरी घटना के बारे में बता रही है।

हमसे जुड़ें

239,591FansLike
63,527FollowersFollow
274,000SubscribersSubscribe