बस्तर से कॉन्ग्रेसी सांसद दीपक बैज ने जीडीपी के मुद्दे को मोदी की दाढ़ी से जोड़ दिया, कॉन्ग्रेसी नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने बंगाल-चुनाव के साथ तो वहीं तेजप्रताप यादव ने पेट्रोल के दामों के साथ।
जहाँ संविधान को गाली दी गई, वहाँ की हाथों में तिरंगा लिए लोगों की तस्वीरें वायरल की गईं। जहाँ हिन्दू धर्म का अपमान हुआ, वहाँ कश्मीरी पंडितों के लिए झूठा शोक मनाया गया।
तब भी तो हुए थे कृषि सुधार। 'हरित क्रांति' की नींव रखने वाले लाल बहादुर शास्त्री को वामपंथियों ने अमेरिका का एजेंट तक कहा, जम कर विरोध किया, पर वो झुके नहीं।
अयोध्या में भूमि पूजन हो चुका है। निधि समर्पण अभियान चल रहा है। ऐसे में सहज जिज्ञासा हो सकती है कि इस सवाल का क्या तुक है? वजहें ठोस है और हर हिंदू के लिए जानना जरूरी है।
ट्विटर के इस कदम का विरोध करने वाले ये वही 'निष्पक्ष' उदारवादी लोग हैं, जो कुछ ही दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप का ट्विटर अकाउंट बंद किए जाने का जश्न मना रहे थे।