इसमें कोई संदेह नहीं है कि बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2019 में ओडिशा में जबरदस्त सफलता पाई है। संसदीय सीटों में 8 गुना वृद्धि और विधानसभा चुनावों में दोगुने से अधिक लाभ प्राप्त किया है। दोनों चुनावों में वोट शेयर भी लगभग दोगुना है।
योगेन्द्र यादव ने जनता को भला-बुरा कहा, करोड़ों मतदाताओं को अनभिज्ञ, भटका हुआ, पूर्वग्रह से ग्रसित और सम्मोहित, बताते हुए पूछा है, "क्या मैं उन सबको कॉलर पकड़ कर बताऊँ कि तुम कट्टर हो, धर्मांध हो?"
वो मामला (इसे आप धार्मिक कह लें या सांस्कृतिक) जिसने बंगाल की रगों में ममता के विरुद्ध सोच पनपने की जमीन तैयार की। वो मामला राजनीतिक नहीं था। वो मामला RSS या BJP के द्वारा तैयार नहीं किया गया था। बल्कि उस मामले को ममता ने खुद अपने हाथों से तैयार किया। छले गए बंगालियों ने...
स्मृति इरानी से सुरेन्द्र के शव को कंधा दिया। बंगाल में मारे गए कार्यकर्ताओं के परिवारों को मोदी के शपथग्रहण समरोह में बुलाया जा रहा है। किसी भी नेता या दल को अपने कार्यकर्ताओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, इसका उदाहरण रामायण में मिलता है।
स्वरा भास्कर के लिए ऑर्गेज्म यानी संभोग के दौरान चरमसुख पाना लैंगिक समानता का मसला हो सकता है, उन तमाम औरतों को लिए नहीं जिनके लिए ज़िंदा रहना ही सबसे बड़ा संघर्ष है।
कहाँ से आता है इतना दुस्साहस कि किसी के धार्मिक स्थल पर घुस कर उनके धर्म को नकली कहा जाए, उसका मजाक उड़ाया जाए? और कहीं से नहीं, हमारी तथाकथित ‘सेक्युलर’ व्यवस्था से ही...
‘धंधे’ में पक कर पक्के हुए निखिल वागले के द्वारा यह अनभिज्ञता नहीं, कुटिलता है, क्योंकि अगर इतने साल बाद भी वह ‘अनभिज्ञ’ हैं निर्वाचन और जनमत-संग्रह के अंतर से, तो वह इतने साल से कर क्या रहे थे?
गौतम गंभीर की गुरुग्राम वाली घटना को लेकर दी गई 'सेकुलरिज्म और सहिष्णुता' वाली प्रतिक्रया 'भेंडिया आया' वाली कहानी को चरितार्थ करती है। एक सप्ताह भी नहीं हुआ और गौती पीएम मोदी की 'छपास और दिखास' वाली सलाह को भूल गए। और, जब सच सामने आया तो...
जिस देश को आज़ाद कराने की कोशिश में सावरकर ने अंग्रेजों द्वारा कालापानी की सज़ा पाई, उसी देश के आज़ाद होने के बाद की नेहरू सरकार ने सावरकर का मुँह पर ताला लगा दिया। नेहरू ने सावरकर के साथ सौतेला व्यवहार किया। जानिए कैसे लाल बहादुर शास्त्री ने किया सावरकर के साथ 'न्याय'....