विचार

गोरों से स्वीकृति खोजते अमर्त्य सेन, नोबेल का मेडल घटिया तर्क को सुनहरा नहीं बना सकता

देश में बदलाव का दौर है और अमर्त्य सेन की रेवड़ीनॉमिक्स तो वैसे ही अप्रासंगिक है- बेहतर होगा वे खुद अप्रासंगिक हो जाने से खुद को बचाएँ।

लाल सलाम से खेलने वाले बच्चे ने थामी भगवा लहर, कहानी एक Stupid Common बंगाली की

वो मामला (इसे आप धार्मिक कह लें या सांस्कृतिक) जिसने बंगाल की रगों में ममता के विरुद्ध सोच पनपने की जमीन तैयार की। वो मामला राजनीतिक नहीं था। वो मामला RSS या BJP के द्वारा तैयार नहीं किया गया था। बल्कि उस मामले को ममता ने खुद अपने हाथों से तैयार किया। छले गए बंगालियों ने...

राम, रामायण और BJP: कार्यकर्ताओं से पार्टी है, पार्टी से कार्यकर्ता नहीं

स्मृति इरानी से सुरेन्द्र के शव को कंधा दिया। बंगाल में मारे गए कार्यकर्ताओं के परिवारों को मोदी के शपथग्रहण समरोह में बुलाया जा रहा है। किसी भी नेता या दल को अपने कार्यकर्ताओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, इसका उदाहरण रामायण में मिलता है।

स्वरा भास्कर का फ़र्ज़ी फेमिनिज़्म और आँकड़े: राहतें और भी हैं ऑर्गेज्म की राहत के सिवा

स्वरा भास्कर के लिए ऑर्गेज्म यानी संभोग के दौरान चरमसुख पाना लैंगिक समानता का मसला हो सकता है, उन तमाम औरतों को लिए नहीं जिनके लिए ज़िंदा रहना ही सबसे बड़ा संघर्ष है।

आदियोगी की प्रतिमा के सामने ईसाई मिशनरी की बेहूदगी हिन्दुओं के धैर्य की परीक्षा ही है

कहाँ से आता है इतना दुस्साहस कि किसी के धार्मिक स्थल पर घुस कर उनके धर्म को नकली कहा जाए, उसका मजाक उड़ाया जाए? और कहीं से नहीं, हमारी तथाकथित ‘सेक्युलर’ व्यवस्था से ही...

वागले, फ़र्ज़ी ज्ञान और प्रपंच पर मिल रही गालियों का सम्मान कर और ट्विटर से भाग ले

‘धंधे’ में पक कर पक्के हुए निखिल वागले के द्वारा यह अनभिज्ञता नहीं, कुटिलता है, क्योंकि अगर इतने साल बाद भी वह ‘अनभिज्ञ’ हैं निर्वाचन और जनमत-संग्रह के अंतर से, तो वह इतने साल से कर क्या रहे थे?

गुरुग्राम: न मुस्लिम की टोपी उछली, न ‘जय श्री राम’, कुछ घटिया लोगों ने दिया मज़हबी रंग

गौतम गंभीर की गुरुग्राम वाली घटना को लेकर दी गई 'सेकुलरिज्म और सहिष्णुता' वाली प्रतिक्रया 'भेंडिया आया' वाली कहानी को चरितार्थ करती है। एक सप्ताह भी नहीं हुआ और गौती पीएम मोदी की 'छपास और दिखास' वाली सलाह को भूल गए। और, जब सच सामने आया तो...

आज़ाद भारत में नेहरू ने सावरकर पर लगाया ‘प्रतिबन्ध’, जानिए फिर शास्त्री ने कैसे किया ‘न्याय’

जिस देश को आज़ाद कराने की कोशिश में सावरकर ने अंग्रेजों द्वारा कालापानी की सज़ा पाई, उसी देश के आज़ाद होने के बाद की नेहरू सरकार ने सावरकर का मुँह पर ताला लगा दिया। नेहरू ने सावरकर के साथ सौतेला व्यवहार किया। जानिए कैसे लाल बहादुर शास्त्री ने किया सावरकर के साथ 'न्याय'....

‘मैं मुस्लिम महिला हूँ… मुझे मोदी की जीत से डर नहीं लगता, मेरे लिए ख्याली आँसू मत बहाओ’

बार-बार मुझे मेरे धर्म से अवगत मत कराइए। बार-बार मत बताइए कि मुझे डरने की जरूरत है। ट्विटर-टीवी से बाहर अधिकांश मुस्लिमों का जीवन आम है, आप जैसा ही है। आप जो कर रहे हैं वो बिलकुल उतना ही साम्प्रादायिक है जितना एक मुस्लिम से कहना कि वो अपना राष्ट्रवाद साबित करे।

महात्मा गाँधी की अध्यक्षता में सावरकर के सम्मान में कविता पाठ: किस्सा जो आज के कॉन्ग्रेसी भूल गए

यह एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी की दास्ताँ है, जिसे उसका वास्तविक हक कभी नहीं मिला। वर्तमान कॉन्ग्रेस को शायद जानकारी नहीं है। साल 1923-24 में कॉन्ग्रेस अधिवेशन की महात्मा गाँधी अध्यक्षता कर रहे थे, तो सावरकर के सम्मान में कविता पाठ किया गया था।

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