विचार

UAE में खुले में नमाज पर ₹20000 जुर्माना: ‘द गार्डियन’ के लिए मुस्लिम पीड़ित और हिन्दू गुंडे, सड़कों को बता रहा ‘नमाज साइट्स’

90% सुन्नी मुस्लिम जनसंख्या वाले UAE में सड़क किनारे नमाज पढ़ने पर Dh 1000 (20,484 रुपए) के जुर्माने का प्रावधान है। गुरुग्राम पर हंगामा क्यों?

विनोद दुआ को कैसे याद करूँ… पाखंड हुआ नहीं जाता और गोधरा में जलाए गए रामभक्त भी याद आ रहे

इसे पाखंड कहूँ या विडंबना विनोद दुआ को उसी तरह की श्रद्धांजलि खूब पड़ रही है जो वे नहीं चाहते थे। दुखद यह है कि ऐसा उनके लिबरल-सेकुलर मित्र भी कर रहे।

सियासत होय जब ‘हिंसा’ की, उद्योग-धंधा कहाँ से होय: क्या अडानी-ममता मुलाकात से ही बदल जाएगा बंगाल में निवेश का माहौल

एक उद्योगपति और मुख्यमंत्री की मुलाकात आम बात है। पर जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हों और उद्योगपति गौतम अडानी तो उसे आम कैसे कहा जा सकता?

यूपीए है ही नहीं… विपक्षी एकता की मृगमरीचिका में खुद को राष्ट्रीय नेता साबित करने में लगीं ममता, लगाएँगी कॉन्ग्रेस को पलीता

अधीर रंजन चौधरी और ममता बनर्जी के बीच वक्तव्यों की यह लड़ाई चाहे जितनी गंभीर हो, कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके केंद्रीय नेतृत्व को पता है कि बिना उनके विपक्षी एकता की कल्पना तो संभव है पर एकता संभव नहीं है।

‘मथुरा की तैयारी है’: केशव मौर्य के बयान से अखिलेश यादव को लगी मिर्ची, सन् 1670 की गलती सुधारने का यही सही समय?

मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि के अतिक्रमण का मुद्दा नया नहीं है। मामला अदालत में भी चल रहा। शाही ईदगाह मस्जिद औरंगजेब ने मंदिर तोड़ कर बनवाया था।

एक तो वामपंथी, फिर भीतर का ‘ग्रेटा थनबर्ग’ भी उछाल मारे… जीसस खैर करें: आंदोलनजीवी से भारत ही नहीं, ऑस्ट्रेलिया भी त्रस्त

पर्यावरण की रक्षा के लिए बात-बात पर किए जा रहे आंदोलन और उसके लिए व्यवहारिक हल के तरीकों में हमेशा अंतर क्यों?

कभी ज़िंदा जलाया, कभी काट कर टाँगा: ₹60000 करोड़ का नुकसान, हत्या-बलात्कार और हिंसा – ये सब देश को देकर जाएँगे ‘किसान’

'किसान आंदोलन' के कारण देश को 60,000 करोड़ रुपए का घाटा सहना पड़ा। हत्या और बलात्कार की घटनाएँ हुईं। आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।

माना लोकतंत्र में विपक्ष हो, पर जब उसकी नकारात्मक राजनीति लोकतंत्र के लिए ही नासूर बन जाए तो क्या करें?

ऐसे विपक्ष का क्या इलाज है? क्या लोकतंत्र के नाम पर ऐसे विपक्ष को ढोते रहना चाहिए?

बेचारा लोकतंत्र! विपक्ष के मन का हुआ तो मजबूत वर्ना सीधे हत्या: नारे, निलंबन के बीच हंगामेदार रहा वार्म अप सेशन

संसद में परंपरा के अनुरूप आचरण न करने से लोकतंत्र मजबूत होता है और उस आचरण के लिए निलंबन पर लोकतंत्र की हत्या हो जाती है।

त्रिपुरा में ऐसे खिला कमल, मुरझा गया सारा प्रोपेगेंडा: जानिए बीजेपी की नॉर्थ-ईस्ट पॉलिटिक्स के लिए ये नतीजे कितने शुभ

वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा उत्तर-पूर्वी राज्यों में विकास प्राथमिकता देने का असर बाकी राज्यों की तरह त्रिपुरा में भी दिखाई दे रहा है।

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