राजनैतिक मुद्दे

सोशल मीडिया पोस्ट के लिए पत्रकारों (या आम नागरिकों) की गिरफ़्तारी पर कहाँ खड़े हैं आप?

क्या हमारे पास इतना समय है कि ऐसे सड़कछाप पत्रकारों के ट्वीट पर उसके घर दो पुलिस वाले को भेज कर उठवा लिया जाए जबकि हर मिनट बलात्कार हो रहे हैं? क्या सरकारों की पुलिस या कोर्ट जैसी संस्थाओं को पास ऐसी बातों को लिए समय है जबकि करोड़ से अधिक गंभीर केस लंबित पड़े हैं?

हाशिए पर खड़े लुटियंस-खान मार्केट गिरोह बने ‘प्राउड’ हिंदुस्तानी, इन्हें सत्ता की मलाई चाहिए

यह गैंग न होने का कैसा सबूत है कि पिता खान मार्केट बँगले में रहे, पति भी उसी सर्विस, उसी सर्किल में, और उसके बाद आपके दामाद की तैनाती बैंक की खान मार्केट शाखा में ?

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए 7 प्राथमिकताएँ, जिन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को खरे उतरना है

सेना के साथ-साथ सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण का कार्य रक्षा मंत्री की प्राथमिकता होनी चाहिए। क्योंकि भाजपा को जो स्पष्ट जनादेश मिला है, वो राष्ट्रवाद एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे पर मिला है।

2 दिन में धराशाई हुआ NDTV का प्रोपेगेंडा, PM मोदी और डोवाल को लेकर बेच रहा था झूठ

स्वनामधन्य न्यूज़ चैनल एनडीटीवी की वेबसाइट पर नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के एक दिन बाद ही बिजली की तेज़ी से यह विश्लेषण प्रकाशित किया गया कि मोदी ने अजित डोभाल के 'पर क़तर दिए।'

प्रिय होम मिनिस्टर, आतंकियों की लाशें परिवार को सौंप कर उन्हें हीरो बनाना कब बंद होगा?

इस दूसरे कार्यकाल में इन आतंकियों को हीरो बनाने से रोकना एक प्राथमिकता होनी चाहिए। जिसने निर्दोषों को क़त्ल के लिए बंदूक उठा ली, वो मानव नहीं है। जो मानव नहीं है, उसके न तो अधिकार हैं, न परिवार।

थरूरों, योगेंद्र यादवों, येचुरियों को जनादेश ने पीट कर सुन्न कर दिया, लेकिन इनकी ऐंठ कायम है

कोई भी पार्टी खुल कर, बिना किसी अगर-मगर के यह तक मानने को तैयार नहीं दिख रहा है कि उनसे मूलभूत स्तर पर कोई गलती हुई है, तो सुधार तो दूर की कौड़ी है।

मंत्रियों के जाति-धर्म पर चल रहे मीडिया शोध से आखिर कौन-सी अच्छी बात हो जाएगी?

30 मई को जिन मंत्रियों ने शपथ ली, उनकी जाति-धर्म पर शोध हुए और खबरें बना दी गईं। जाति और धर्म का एंगल देकर निष्कर्ष ये निकाला गया कि मोदी सरकार ने भले ही ‘सबका साथ-सबका विकास’ करने की कितनी ही कोशिश क्यों न की हो, लेकिन उनकी मंत्रिपरिषद में ऊँची जाति वालों का ही आधिपत्य है।

प्रगतिशील (सेक्युलर/लिबरल) बुद्धिजीवी बनने के 10 नुस्खे

चर्चा के विषय से इतर बीच-बीच में दार्शनिक ज्ञान अवश्य बघारें। जरूरत के हिसाब से नास्तिक की अलग-अलग श्रेणियों यथा ईश्वरद्रोही, ईश्वर को न मानने वाला या सिद्ध होने पर ईश्वर को मान लेने की श्रेणी में कूद-फांद करते रहें।

द इलेक्टोरल मशीन: TsuNaMo के बावजूद ओडिशा में नवीन पटनायक क्यों जीते?

इसमें कोई संदेह नहीं है कि बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2019 में ओडिशा में जबरदस्त सफलता पाई है। संसदीय सीटों में 8 गुना वृद्धि और विधानसभा चुनावों में दोगुने से अधिक लाभ प्राप्त किया है। दोनों चुनावों में वोट शेयर भी लगभग दोगुना है।

जनादेश से बौखला कर जनता को ‘कॉलर पकड़ कर धमकाने’ वाले YoYa की दाढ़ी में कितने तिनके?

योगेन्द्र यादव ने जनता को भला-बुरा कहा, करोड़ों मतदाताओं को अनभिज्ञ, भटका हुआ, पूर्वग्रह से ग्रसित और सम्मोहित, बताते हुए पूछा है, "क्या मैं उन सबको कॉलर पकड़ कर बताऊँ कि तुम कट्टर हो, धर्मांध हो?"

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें