राजनैतिक मुद्दे

राम, रामायण और BJP: कार्यकर्ताओं से पार्टी है, पार्टी से कार्यकर्ता नहीं

स्मृति इरानी से सुरेन्द्र के शव को कंधा दिया। बंगाल में मारे गए कार्यकर्ताओं के परिवारों को मोदी के शपथग्रहण समरोह में बुलाया जा रहा है। किसी भी नेता या दल को अपने कार्यकर्ताओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, इसका उदाहरण रामायण में मिलता है।

वागले, फ़र्ज़ी ज्ञान और प्रपंच पर मिल रही गालियों का सम्मान कर और ट्विटर से भाग ले

‘धंधे’ में पक कर पक्के हुए निखिल वागले के द्वारा यह अनभिज्ञता नहीं, कुटिलता है, क्योंकि अगर इतने साल बाद भी वह ‘अनभिज्ञ’ हैं निर्वाचन और जनमत-संग्रह के अंतर से, तो वह इतने साल से कर क्या रहे थे?

आज़ाद भारत में नेहरू ने सावरकर पर लगाया ‘प्रतिबन्ध’, जानिए फिर शास्त्री ने कैसे किया ‘न्याय’

जिस देश को आज़ाद कराने की कोशिश में सावरकर ने अंग्रेजों द्वारा कालापानी की सज़ा पाई, उसी देश के आज़ाद होने के बाद की नेहरू सरकार ने सावरकर का मुँह पर ताला लगा दिया। नेहरू ने सावरकर के साथ सौतेला व्यवहार किया। जानिए कैसे लाल बहादुर शास्त्री ने किया सावरकर के साथ 'न्याय'....

महात्मा गाँधी की अध्यक्षता में सावरकर के सम्मान में कविता पाठ: किस्सा जो आज के कॉन्ग्रेसी भूल गए

यह एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी की दास्ताँ है, जिसे उसका वास्तविक हक कभी नहीं मिला। वर्तमान कॉन्ग्रेस को शायद जानकारी नहीं है। साल 1923-24 में कॉन्ग्रेस अधिवेशन की महात्मा गाँधी अध्यक्षता कर रहे थे, तो सावरकर के सम्मान में कविता पाठ किया गया था।

माँ और महादेव से लेकर आडवाणी और पटेल तक: PM मोदी के ताज़ा दौरों से मिल रहे संकेत

बुद्ध पूर्णिमा के दिन केदारनाथ में ध्यान। फिर भाजपा के अभिभावकों से आशीर्वाद। उसके बाद अपनी माँ के चरणों में झुके और परिवारजनों से मुलाक़ात की। फिर गृह राज्य की जनता को धन्यवाद देते हुए सरदार पटेल को याद किया। तत्पश्चात वापस काशी। संविधान को शीश नवाने वाले मोदी...

लिबरल गिरोह, जले पर स्नेहलेप लगाओ, मोदी के भाषण पर पूर्वग्रहों का ज़हर मत डालो

उसी भविष्य में मत जाओ जहाँ तुमने 2014 की मई में कहा था कि अब तो सड़कों पर हिन्दू नंगी तलवारें लिए दौड़ेंगे, अल्पसंख्यकों को तो काट दिया जाएगा, गली-गली में दंगे होंगे, मस्जिदों का तोड़ दिया जाएगा, उनकी बस्तियों पर बम गिराए जाएँगे… और वैसा कुछ भी नहीं हुआ

दुष्प्रचार से बाज नहीं आ रहा The Wire, समुदाय विशेष के मोदी-समर्थक लोगों को समाज से अलग-थलग करने की कोशिश

नए भारत में नफरती चिंटुओं वाली पत्रकारिता नहीं चलेगी, फर्जी भय का नैरेटिव नहीं चलेगा-वायर सबक सीखने की जहमत उठाए, या दुकान समेटने की तैयारी करे।

साध्वी प्रज्ञा: जिसने टूटी रीढ़ के साथ हिन्दू टेरर के नैरेटिव को छिन्न-भिन्न कर दिया

"साध्वी प्रज्ञा की भाजपा से उम्मीदवारी ‘भगवा या हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा' के खिलाफ भाजपा का सत्याग्रह है।" लोकसभा उम्मीदवार घोषित होने के पहले साध्वी प्रज्ञा ने भी एक सवाल के जवाब में कहा था, ‘‘मैं धर्मयुद्ध के लिए तैयार हूँ।''

भारत दुर्दशा से कॉन्ग्रेस दुर्दशा तक: नकली गाँधियों ने अपनी कब्र खोदी और दोष भाजपा पर डाला

भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर बिना किसी पुख्ता सबूत या तथ्य के निराधार आरोप लगाए जाने पर औंधे मुँह गिरे राहुल गाँधी को जनता ने मुँहतोड़ जवाब दिया है। वैसे इसकी संभावना भी कम ही है कि इतना कुछ होने के बाद भी वो इससे कुछ सीख ले पाएँगे।

नकली गाँधी परिवार के चिराग की हार के वो कारण, जिसके बचाव में उतरा लिबरल मीडिया गिरोह

यह कहना ग़लत नहीं होगा कि राहुल गाँधी हमेशा इसी फ़िराक में रहे कि मोदी कब कोई चूक करें और फिर उन्हें मुद्दा बनाकर जनता के समक्ष उनकी छवि को धूमिल किया जा सके।

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