वायनाड में जनजातीय समाज के रमन नाम्बि का सिर काट कर उनके छोटे से बच्चे के सामने प्रदर्शित किया गया। उसी वायनाड में प्रियंका गाँधी कहती हैं कि अहिंसा से आज़ादी मिली। क्या ये ऐसे क्रांतिकारियों का अपमान नहीं?
स्वामीजी के अनुयायी भारत में आकर भारतीय हो गए। न कोई सेवा के नाम पर धर्मांतरण का छलावा न कोई मान-सम्मान की चाहत। उन्होंने निस्वार्थ भाव से माँ भारती की सेवा की।