राजनैतिक मुद्दे

जो हिंदुओं को बनाता था ईसाई उसकी हत्या पर बॉलीवुड फिल्म, उसकी विधवा को पद्मश्रीः जो संत कराते थे घर वापसी-बचाते थे गाय, उनको...

1999 में एक ईसाई मिशनरी की हत्या पर फिल्म बन जाती है, लेकिन 2008 में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या पर कोई चर्चा नहीं। वनवासी समाज के उत्थान के लिए किए गए उनके कार्यों को याद नहीं किया जाता।

क्या लोकसभा चुनाव में मोदी से मुकाबिल होंगे केजरीवाल: ‘मिशन 2024’ AAP का हसीन ख्वाब या विपक्षी गोलबंदी रोकने की BJP की चाल

क्या 2024 में बीजेपी के मुकाबिल होगी आप? क्या दोनों पार्टियों के बीच पर्दे के पीछे हुई है डील? क्या अगले लोकसभा चुनाव के लिए 'हिडेन प्लान' पर काम कर रही बीजेपी?

वामपंथियों ने तिरंगे से बना ली दूरी, नेहरू तक सीमित रहे कॉन्ग्रेसी: जिस सरकार ने लोगों को दिए 1.26 करोड़ मकान, उस पर ‘घर...

राष्ट्रीय गौरव के इस पर्व पर इस तरह से विरोध करना किस तरह से सही व तर्कसम्मत है? कॉन्ग्रेस ने भी तिरंगा अभियान को नेहरू तक सीमित कर दिया।

‘दलाल गिरोह’ याद कर रहा 1997, क्योंकि 2014 में लालू यादव की कृपा वाला PM नहीं: सोते गुजराल को जगा कर कहा था –...

जब देश ने आज़ादी के 50 वर्ष पूरे किए थे, तब लालू यादव के कृपापात्र इंद्र कुमार गुजराल PM थे। 90 के दशक के भारत को याद कर रहा गिरोह, लेकिन यहाँ जानिए तब क्या थी देश की स्थिति।

वो हिंदुस्तानी जो अभी भी नहीं हैं आजाद: PoJK के लोग देख रहे आशाभरी नजरों से भारत की ओर, हिंदू-सिखों का यहाँ हुआ था...

विभाजन की विभीषिका को भी भुलाया नहीं जा सकता। स्वतंत्रता-प्राप्ति का मूल्य समझकर और स्वतन्त्रता का मूल्य चुकाकर ही हम अपनी स्वतंत्रता को सुरक्षित और संरक्षित कर सकते हैं।

स्वतंत्रता के हुए 75 साल, फिर भी बाँटी जा रही मुफ्त की रेवड़ी: स्वावलंबन और स्वदेशी से ही आएगी आर्थिक आत्मनिर्भरता

जब हम यह मानते हैं कि सत्य की ही जय होती है तब ईमानदार सत्यवादी देशभक्त नेताओं और उनके समर्थकों को ईडी आदि से भयभीत नहीं होना चाहिए।

हिंदू-सिखों को मरते छोड़ भाग गए थे कॉन्ग्रेसी नेता, सैकड़ों RSS कार्यकर्ताओं के बलिदान से बची हजारों जिंदगी: इतिहास की इन किताबों से जानें...

भारत बँटवारे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने बहादुरी का परिचय देते हुए सैकड़ों हिंदू-सिख परिवारों की रक्षा की।

लालू-नीतीश से ऊब चुके बिहार में कौन होगा BJP का देवेंद्र फड़नवीस? कीचड़ में कमल खिलाने वाला चाहिए, लेकिन पार्टी के अधिकतर नेता अपने...

बिहार भाजपा के अधिकतर बड़े नेताओं का अपने जिले से बाहर कोई जनाधार नहीं है। ऐसे में देवेंद्र फड़नवीस वाला कार्य कौन कर सकता है? तेजस्वी बनाम कौन?

कोउ नृप (सरकार) होउ बिहारी को ही हानी… नीतीश कुमार इधर रहें या जंगलराज की छाया में पसरें, बिहार पर बोझ बना रहेगा

बिहार सियासी तौर पर अभिशप्त है। फिर भी जंगलराज की छाया से दूर रहने का सुकून था। हालिया राजनीतिक हलचल उस सुकून पर हमले जैसा है।

पसमांदा से ही मुस्लिम ‘वोट बैंक’, मजहबी भीड़ भी इनसे ही: चाहिए दलितों का कोटा, पर वोट उनको जिधर मदरसे-मौलवी

कौन हैं पसमांदा मुस्लिम? 'सबका साथ-सबका विकास' के बाद क्यों चर्चा में पसमांदा प्लान? क्या 2024 के लिए ऐसे किसी प्रयोग की बीजेपी को सच में जरूरत है?

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