'किसान आंदोलन' से रेप-हत्या की खबरें आती थीं, 'किसान गर्जना रैली' में अलग-अलग संस्कृतियों का प्रदर्शन दिखा। आक्रोश तो था, लेकिन दुर्भावना नहीं। टिकैत जैसों को ये फर्क देखना चाहिए। यहाँ टुकड़े-टुकड़े की बातें करने वाले खालिस्तान नहीं थे, 'भारत माता' थीं।
कॉन्ग्रेस G-20 के लोगो में जिस कमल के फूल की कर रही आलोचना, वह सिर्फ भाजपा का चुनाव चिह्न नहीं, सनातन धर्म में भी विशेष महत्व रखता है। देश का राष्ट्रीय फूल है।