राजनैतिक मुद्दे

बिहार में कुछ अच्छा हो, कोई अच्छा काम करे… और वो मोदी से जुड़ा हो तो ‘चुड़ैल मीडिया’ भला क्यों दिखाए?

सुल्तानगंज-कहलगाँव के 60 km के क्षेत्र को “विक्रमशिला गांगेय डॉलफिन सैंक्चुअरी” घोषित किया जा चुका है। इस काम को और एक कदम आगे ले जा कर...

8.5% कमीशन आढ़तिया और राज्य सरकार का…ऐसे लूटा जाता है किसान की उपज को, फिर भी घड़ियाली आँसू बहा रहा विपक्ष

इन तीनों विधेयकों की सही और पूरी जानकारी किसानों तक पहुँच नहीं पाई है। यह सरकार की विफलता ही मानी जाएगी। इतने महत्वपूर्ण और दूरगामी...

केवल इसी को बेचो या अपनी मर्जी से कहीं भी बेचो… किसान के लिए क्या बेहतर?

तरह-तरह के जुमलों से किसानों को बरगलाने की कोशिश की जा रही है। MSP जो कि अभी भी लागू है, उसके ख़त्म किए जाने का डर बनाया जा रहा...

‘बिचौलिया’ मदर इंडिया का लाला नहीं… अब वो कंट्रोल करता है पूरा मार्केट: कृषि विधेयक इनका फन कुचलने के लिए

'बिचौलिया' मतलब छोटी मछली नहीं, बड़े किलर शार्क। ये एक इशारे पर दर्जनों वेयरहाउस से आपूर्ति धीमी करवा, कई राज्यों में कीमतें बढ़ा सकते हैं।

86 साल बाद निर्मली और भपटियाही का ‘मिलन’, पर आत्मनिर्भर बिहार कब बनेगा

आखिर आत्मनिर्भर बिहार कब बनेगा जहाँ के लोग रोजगार के लिए पलायन करने के बदले रोजगार देने वाले बनें?

उनके लिए धर्म अफीम है, मजहब नहीं: बेगूसराय में निपटा ‘लफंगा’ अब अपनों के गेम से चित

बेगूसराय ने जब वामपंथी पोस्टर बॉय को नकार दिया तो अब 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' ने उसी कुकृत्य से कुख्यात हुए एक दूसरे चेहरे को सामने रखना शुरू कर दिया है।

प्रवासी: तापसी पन्नू का वैचारिक प्रपंच

तापसी श्रमिक पालयन के मूल कारण पर मौन क्यों हैं? महामारी नियंत्रण में केंद्र सरकार के प्रयासों को विफल क्यों करना चाहती हैं, देश में अराजकता क्यों बढ़ाना चाहती हैं?

युद्ध पिपासु शी जिनपिंग: इतनी जल्दी नहीं मानेगा हार, देश को रहना होगा कठिन दिनों के लिए तैयार

गलवान की खिसियाहट में शी जिंगपिंग अपनी सेना के कई अफसरों की बलि चढ़ा सकते हैं। झल्लाहट में वे सीमा पर बड़ा कारनामा करने की भी...

चीन के खिलाफ बोलने से बचने के लिए तो नहीं भागे राहुल-सोनिया? मॉनसून सत्र के आधे हिस्से में नहीं रहेंगे दोनों

ये सवाल तो उठेगा ही कि क्या सोनिया गाँधी और राहुल चीन के डर से संसद सत्र के पहले हिस्से में भाग नहीं ले रहे हैं? चीन की आलोचना से बच रहे?

तेजप्रताप के लिए रघुवंश ‘एक लोटा पानी’… फिर उनके इस्तीफे से लालू इतने बेचैन क्यों?

भले रघुवंश प्रसाद सिंह का प्रभाव सीमित हो। लेकिन लालू जानते हैं कि उनके बिना तेजस्वी की चुनावी राजनीति सुरक्षित नहीं है। सो, मनाने की कोशिशें जारी है।

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