सामाजिक मुद्दे

मुताह निकाह: ‘कुछ दिन के मजे’ वाली मजहबी संस्कृति के नाम पर ‘अमीना-शबानाओं’ का उत्पीड़न

कभी वो बच्ची अमीना थी, कभी शबाना, आलिया, रुखसाना या कोई और हो जाएगी। सवाल ये है कि निकाह के नाम पर लड़कियों के भविष्य से ये खिलवाड़ बंद क्यों नहीं होता?

तनिष्क मामला: NDTV की फर्जी खबर और हलाला वाले घरों में ‘प्यार’ बँटवाती जहरवाली वामपंथन

अपनी गलती मानते हुए भी आरोप आप ही पर कि आगे ये लोग दंगा कर देंगे, हिंसा कर देंगे, इसलिए हमने हटाया वरना विज्ञापन में तो ऐसा कुछ है नहीं, जो नहीं समझे उन्हीं की गलती है।

पहले घटिया ‘सेक्युलर’ एड बना कर लव जिहाद को किया मेनस्ट्रीम, अब फर्जी हिंसा की धमकी की बात कर रहा Tanishq

एक तो 'Tanishq ने विज्ञापन वीडियो बना कर 'लव जिहाद' का महिमामंडन किया, ऊपर से अब वो स्पष्टीकरण जारी कर के हिन्दुओं को ही हिंसक दिखा रहा है।

Tanishq नहीं… इस धनतेरस #VocalForLocal, स्थानीय सुनार को मिले दीपावली मनाने का मौका

स्थानीय सुनार को भी मौका दीजिए! इस धनतेरस में उसे भी तो दीपावली मनाने का मौका मिलना चाहिए ना? हॉलमार्क जैसे मानकों से लैस कई सुनार...

चरसी वामपंथनों के नाम: ‘बड़ा प्यारा एड था’ से शुरू ‘संघी साले मूर्ख होते हैं’ पर खत्म (चरसी वामपंथी भी पढ़ें)

चरसी वामपंथनों को 4-5 शब्द गिन कर आते हैं, धनिया की तरह छींटती रहती हैं। तनिष्क पर 'उम्मीद' देखने वाले आदर्श नगर के राहुल को भूल जाते हैं।

Tanishq Vs गदर: सिनेमा हॉल पर 500 की भीड़ का पेट्रोल बम से हमला, पलट गई थीं शबाना आज़मी

कोई तथाकथिक लेखक कहते हैं कि “जिनकी स्वर्ण खरीदने की औकात ही नहीं, वो तनिष्क का बहिष्कार ना करें” तो भारत की उनकी समझ पर हँसी आती है।

हिन्दुओं को कोने में ढकेलना बंद करो, 101वीं गलती पर सुदर्शन चले तो तहजीब की गजलें मत गाना

हिन्दू बच्चियों से 'लव' और 'रेप जिहाद', 70+ हिन्दुओं की मजहबी भीड़ द्वारा लिंचिंग... ये 'bleed Hindus with thousand cuts' की नीति है।

लड़की के परिवार वाले और हत्या: आमिर खान की फिल्म से लेकर ‘ऑनर किलिंग’ पर अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट तक

“क़यामत से क़यामत तक” जैसी फिल्मों के जरिए सेट किया गया नैरेटिव भी कहता है कि अक्सर ऐसे मामलों में लड़की के परिवार वाले ही हत्या...

चे ग्वेरा: रक्तपिपासु, होमोफ़ोबिक, नस्लवादी.. मार्क्सवादी क्रांति व लिबरल्स के रूमानी नायक से जुड़े वो खौफनाक तथ्य जिन्हें सभी नकारना चाहते हैं

'ग्वेरावादियों' ने ऐसी किसी भी चीज़ से मुँह मोड़ लिया, जो ग्वेरा की आदर्श छवि के साथ फिट नहीं बैठती। ग्वेरा निश्चित ही एक जल्लाद था। उसकी नजरों में इंसानों की मौत कुछ भी नहीं थी।

मी लॉर्ड! शाहीन बाग पर आपके फैसले की बत्ती बना कर बीरबल जैसे देखते रहने के अलावा क्या विकल्प है?

यहाँ कट्टरपंथी और वामी-कामी गिरोह सत्तू-नमक बाँध कर बैठा है कि जब तक दो भी जिंदा रहेगा आपसे में ही लड़ मरेंगे, एक ही बचा तो हाथ में तलवार और पैर के अँगूठे और दूसरी उँगली के बीच में कटार फँसा कर लड़ता रहेगा। उसका जन्म ही अराजकता फैलाने के लिए हुआ है, हिंसा उसकी नियति है, हिन्दूघृणा उसका न बदल सकने वाला पाठ्यक्रम है, आग लगाना उसकी मनोवृत्ति है, दंगा उसके लिए मजहबी आयोजन है…

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