हिन्दू 'बीरबल की खिचड़ी' के उस ब्राह्मण की तरह है जो तुम्हारे शाही किले में जलते दीपक की लौ से भी ऊष्मा पाता है। हिन्दू को बस इससे मतलब है कि उसके आराध्य का मंदिर बन रहा है। लेकिन सवाल यह है, हे सत्ताधीश! कि क्या तुम्हें हिन्दुओं से कुछ मतलब है?
वामपंथीऔर उदारवादियों को यदि किसी मजहब में ज्ञान देना ही है तो उन्हें उन मजहब से शुरुआत करनी चाहिए, जहाँ समाज को शिक्षित करने की सजा गला रेतने के रूप में मिलती है।
हिन्दुओ! अपनी सहिष्णुता को अपनी कमजोरी मत बनाओ। सहिष्णुता की सीमा होती है, पागल कुत्ते के साथ शयन नहीं किया जा सकता, भले ही तुम कितने ही बड़े पशुप्रेमी क्यों न हो।
हमें वे तस्वीरें देखनी चाहिए जो फ्रांस की घटना के पश्चात विभिन्न शहरों में दिखती हैं। सैकड़ों की सँख्या में फ्रांसीसी नागरिक सड़कों पर उतरे यह कहते हुए - "हम भयभीत नहीं हैं।"
जिनके लिए शिया भी काफिर हो चुका हो, अहमदिया भी, उनके लिए ईसाई तो सबसे पहला दुश्मन सदियों से रहा है। ये तो वो युद्ध है जो ये बीच में हार गए थे, लेकिन कहा तो यही जाता है कि वो तब तक लड़ते रहेंगे जब तक जीतेंगे नहीं, चाहे सौ साल लगे या हजार।
जिन्ना समर्थक प्रो बृज नारायण को जिस भीड़ ने अपना शिकार बनाया, उसे सिर्फ हिंदुओं को मारना था। 2 दिन पहले लाहौर में आधा हिन्दू, आधा सिख थे, 2 दिन बाद सिर्फ..
लड़की को शिक्षा के स्तर पर सशक्त बनाना हो या शारीरिक रूप से परिपक्व बनाना हो, जरूरी है कि अब यह उम्र का दायरा थोड़ा और आगे बढ़े व मुमकिन हो तो 21 साल तक इसे किया ही जाना चाहिए।
सेकुलरिज्म और नरसंहारों को नकारने की तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग की आदत को वो अपने दौर में आड़े हाथों लेते रहे। उनका जन्म 16 अक्टूबर 1921 को हुआ था और आज उनकी जन्मतिथि भी है।