बिरियानी में बोटियाँ तलाशते टुकड़ाखोर किसी "फोबिया" शब्द को बिलकुल वैसे ही पत्थरों की तरह चलाते हैं, जैसे अभी-अभी यूपी के किसी जिले में स्वास्थ्यकर्मियों पर चलाए गए। गोएबल्स की ये औलादें गाँधीवादी नहीं हैं। आपको ये भी पता है कि नाज़ियों से किसी गाँधीवादी तरीके से निपटा नहीं गया था।
मार्क्स या माओ के जीवन दर्शन की राह पर चलने वाले वामपंथी अतिवादी बौद्धिक जैव विषाणुओं से अधिक हिंसक हैं। इस नरपिपासु वर्ग ने ही कोरोना जैसे विषाणुओं का आविष्कार करके दुनिया को अभूतपूर्व त्रासदी की स्थिति तक पहुँचा दिया है।
जब डेरा सच्चा सौदा के मुखिया की गिरफ्तारी को लेकर हिंसा हुई तो किसी ने उसे पूरे हिन्दू समाज से नहीं जोड़ा। पटियाला में कुछ सिरफिरे निहंगों ने पुलिस वालों पर हमला लिया तो किसी ने उसे पूरे सिख समाज से नहीं जोड़ा। तो फिर तबलीगी जमात का नाम लेने पर उसे सारे समुदाय को निशाना बनाना कैसे और क्यों माना जा रहा है?
अगर आरक्षण के प्रावधानों से पिछड़ों-दलितों-वंचितों का सशक्तीकरण होता है, तो उन लाभार्थियों की भावी पीढ़ियों को क्रीमी लेयर में शामिल करके भविष्य में आरक्षण लाभ से वंचित क्यों नहीं किया जाना चाहिए? ऐसा करने से ही आरक्षण जैसे संवैधानिक प्रावधान का लाभ त्वरित गति से नीचे तक पहुँचेगा और आरक्षण के क्षेत्र में भी 'ट्रिकल डाउन' की सैद्धान्तिकी सचमुच फलीभूत होगी।
प्रवासियों की कठिनाई को देख कर 'मगध-मित्र' का सोशल मीडिया पर जन्म हुआ। इसका उद्देश्य राजनैतिक दलों की सीमाओं से उठ कर, जिस राज्य अथवा शहर में जिस किसी वालंटियर या स्वयंसेवक समूह का कार्यक्षेत्र हो, उससे वहाँ फँसे श्रमिकों तक सहायता पहुँचाना था।
पहले स्तर के प्रयास में 1700-2000 गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को प्रतिदिन मुफ्त भोजन वितरित किया जा रहा है। दूसरे स्तर का प्रयास इससे वृहत है। इसे "सीकर्स एंड गिवर्स" प्लेटफॉर्म के नाम से समझा जा सकता है। यहाँ एक वो हैं, जो सहायता पाना चाहते हैं और दूसरे वो जो सहायता करना चाहते हैं। दोनों को आपस में कनेक्ट कर...
एक ओर विधिपूर्वक किए गए सभी धार्मिक अनुष्ठान यानी मजहबी इमाल और दूसरी तरफ रोग पीड़ित प्राणियों के प्राणों की रक्षा का कार्य, ये दोनों कर्म समान रूप से पुण्य देने वाले हैं। यानी इस समय डॉक्टर, सुरक्षाकर्मी, सफाईकर्मी जो कार्य कर रहे हैं वो किसी धार्मिक अनुष्ठान से कम नहीं है। इसलिए धर्म के नाम पर धर्म के कार्य में बाधा डालने का अधार्मिक काम करना बंद करें।
6 प्रमुख उद्देश्यों के साथ तबलीगी जमात की एक सबसे बड़ी शर्त और विशेषता इसकी गोपनीयता है। इसी गोपनीयता ने इसकी हरकतों पर हमेशा आवरण का काम किया है। तबलीगी समय के साथ कट्टर जिहादी समूहों में बढ़ते गए और यह विश्वास करने लगे कि 'अच्छे मुस्लिमों' को इसी जीवन में यातनाएँ भोगनी चाहिए।
राजदीप सरदेसाई इसे 'ब्लडी दिवाली' कहते हैं। अरशद वारसी को देश की जनता 'स्टुपिड' नज़र आती है। सोनम कपूर का कुत्ता डर जाता है। शशि थरूर का पॉवर ग्रिड फेल हो जाता है। आख़िर जमातियों का मजहब न देखने की सलाह देने वालों ने '9 बजे 9 मिनट्स' में धर्म कैसे ढूँढ लिया?
प्रार्थना पुरुषार्थ का स्थगन नहीं है और यही वजह है कि प्रार्थना में कुछ भी अवैज्ञानिक नहीं है। Covid-19 को रोकने के सभी प्रयास हमारी शुभकामनाओं से बल पाएँगे और हमें निर्धारित निर्देशों का पालन करने की प्रेरणा देंगे। दवा हमारे शरीर की और दुआ हमारे मन की इम्यूनिटी को बढ़ाती है।