"सब ठीक हो जाएगा। बस लेह का आधा हिस्सा चाइना लेना चाहिए। फिर पता है क्या होगा... दिल्ली में मोदी की माँ-बहन हो जाएगी...। लद्दाख यूटी के फिर हजार टुकड़े हो जाएँगे।"
वह असंतोष न चीन के कम्युनिस्टों के हक में होगा और न भारत के वामपंथियों और उनके पोषक कॉन्ग्रेस के। इसलिए, नानजिंग के प्रेसिडेंशियल पैलेस और जनपथ की बेचैनियाँ आज एक सी दिख रहीं।
7 अगस्त 2008 को सोनिया गाँधी की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस और चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के बीच एक समझौता हुआ था। शायद आज वही वजह है कि कॉन्ग्रेस चीन की नापाक हरकतों पर भी चुप्पी साधे हुए है।
भारत आपदा में रोने वाला देश नहीं है, बल्कि संकट को अवसर में बदलने के लिए गंभीर है। उन्होंने बताया कि कैसे हम आयात पर निर्भरता कम करेंगे और युवाओं को रोजगार देकर भारत को मजबूत बनाएँगे।
भाजपा के दफ्तर में दिखने वाले नेताओं में विधायक रामबाई, संजीव सिंह कुशवाह, सपा विधायक राजेश शुक्ला निर्दलीय विधायक विक्रम सिंह राणा और सुरेंद्र सिंह शेरा शामिल थे।