''मुस्लिमों को शेर बनना होगा ताकि कोई चायवाला उनके सामने खड़ा न हो। मैं अपने लोगों से कहता हूँ कि आप लोग इतने परेशान हैं... परेशान मत हो। नौजवानों मैं आपसे कहूँगा कि जो हम यहाँ करेंगे, उसके बदले में जन्नत या जहन्नूम मिलेगी। शहीद जन्नतों की जन्नत जाता है। तुम सिर्फ़ अल्लाह का नाम लो।''
अमित शाह ने अपनी जनसभा में झारखण्ड के आदिवासियों के लिए सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं का भी ज़िक्र किया। शाह बोले कि उनकी सरकार ने इन 5 सालों में आदिवासियों का गौरव बढ़ाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी।
भारत के सीमवर्ती इलाकों में रह रहे इन हिन्दुओं को राजस्थान पुलिस पाकिस्तान भेजने की तैयारी में है। एक कट्टर इस्लामिक देश होने के चलते पाकिस्तान में हिन्दुओं पर अत्याचार चरम पर हैं। यह सभी परिवार धार्मिक वीसा के बहाने यहाँ इसी लिए रुके थे क्योंकि पाकिस्तान में हिन्दुओं को सिर्फ यातनाएँ ही मिलती हैं।
इसे झेलने वाले यूज़र ने अपने खुद के अनुभव से बताया कि कैसे नाले और सीवर का यह पानी घरों में पानी पहुँचाने वाले पाइप के ज़रिए टंकी तक में भर जाता है। यह पानी एकदम गन्दा, दुर्गन्ध वाला और काला होता है।
इससे पहले संभाजी ब्रिगेड ने भी ट्रेलर में दिखाए गए कुछ सीन्स पर डायरेक्टर से स्पष्टीकरण माँगा हैं। ब्रिगेड ने अपने पत्र में कहा है कि फिल्म में भगवा झंडे पर ओम का चिह्न दिखाकर जानबूझकर शिवाजी की धर्मनिरपेक्ष छवि को खत्म करने की कोशिश की गई है।
"शिवसेना ने हिंदुत्व की रक्षा के नाम पर वोट माँगा था। इसके उलट नतीजे आने के बाद शिवसेना अपने खिलाफ चुनाव लड़ने वाली पार्टियों के साथ सरकार बनाने की कोशिश कर रही है जबकि उसने भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार बनाने के नाम पर वोट माँगा था।"
कॉन्ग्रेस शिवसेना की कट्टर हिन्दुत्व की छवि से संशय में है और वो चाहती है कि इस सन्दर्भ में CMP में एक स्पष्ट संदेश शामिल किया जा सके, जिससे नई सरकार के गठन में किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े।
प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं को ये तक नहीं पता था कि जिस प्रदर्शन में वो शामिल हुए हैं- उसका उद्देश्य क्या है। ऐसे में जब टीवी 9 भारतवर्ष के संवाददाता विपिन चौबे ने हकीकत का खुलासा किया तो वहाँ मोदी मीडिया मुर्दाबाद के नारे लगने लगे और कार्यकर्ता उन पर हावी हो गए।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अधिवक्ता उमेश बोहरे ने गाँधी परिवार को SPG सुरक्षा देने की तत्काल माँग से संबंधित PIL दाखिल की थी। लेकिन कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर यह कहते हुए 25,000 रुपए का जुर्माना लगाया कि याचिकाकर्ता 'सस्ती लोकप्रियता' हासिल करने की कोशिश में था।
प्रियंका गाँधी की ओर से पार्टी के 350 पूर्व सांसद, MLA, MLC, 2019 के लोकसभा उम्मीदवार और 2017 के विधानसभा उम्मीदवारों को बुलावा भेजा गया था। लेकिन इंदिरा गाँधी की छवि वाली प्रियंका के बुलावे के बावजूद आए कितने? सिर्फ 40! मतलब 350 में से सिर्फ 40... बहुत नाइंसाफी हो गया ये तो!