बिल के मुताबिक शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, निवास आदि 8 स्पष्ट क्षेत्रों में ट्रांसजेंडर लोगों के साथ भेदभाव करने को अपराध घोषित किया गया है। इसके अलावा ट्रांसजेंडर की परिभाषा भी इस अधिनियम में तय की गई है। इसके अनुसार ऐसे सभी व्यक्ति जिनका जेंडर (लिंग) उनके जन्म के जेंडर से मेल नहीं खाता, ट्रांसजेंडर की परिभाषा में आएँगे।
अजित पवार को उम्मीद थी कि भाजपा संग उनके गठबंधन को समर्थन देने के लिए कम से कम 30 विधायक ज़रूर साथ होंगे हालाँकि अंत तक उन्हें सिर्फ 12 विधायकों का ही समर्थन मिल सका। इस सियासी घटनाक्रम में धनंजय मुंडे द्वारा यू-टर्न ले लेने से पवार के फैसले पर काफी असर पड़ा।
वामपंथी मंत्री ने एक्टिविस्ट बिंदु अम्मिणी पर हुए हमले को नाटक करार दिया। उन्होंने कहा कि ये सब पूर्व-नियोजित ड्रामा था। बता दें कि बिंदु सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने के लिए जा रही थीं, तभी किसी व्यक्ति ने उनपर मिर्ची स्प्रे से हमला कर दिया था।
फडणवीस ने कहा कि जनता ने गठबंधन को बहुमत दिया लेकिन शिवसेना ऐसी बात पर अड़ी रही, जिसकी कोई बात ही नहीं हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना ने भाजपा के बजाय एनसीपी से बात शुरू कर दी और...
रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि यह निर्णय सैन्य बलों की माँग और ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इसके अलावा यह भी बताया है कि यह कदम सैनिकों के मनोबल में बढ़ोतरी के लिए उठाया गया है।
पूर्व सांसद संतोष सिंह, पूर्व एमएलसी सिराज मेहँदी, यूपी के पूर्व गृहमंत्री रामकृष्ण द्विवेदी, पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी, पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्रा, पूर्व विधायक नेकचन्द्र पाण्डेय, पूर्व विधायक हाफ़िज़ मोहम्मद उमर, पूर्व विधायक विनोद चौधरी के साथ-साथ...
विपक्षी दलों ने संसद के संयुक्त सत्र का बहिष्कार करते हुए महाराष्ट्र मामले को लेकर प्रदर्शन किया। इसमें कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह भी शामिल हुए।
"कई गर्मियां-बरसात और तूफान झेलकर वे खड़े रहे। लेकिन अजीत पवार ने शरद पवार की राजनीतिक इस्टेट में सेंध लगा दी और वहां का माल चुराकर वे भाजपा के खेमे में चले गए।"
NCP के जयंत पाटिल की मानें तो अजित पवार के इस्तीफे से संबंधित खबर का उन्हें पता नहीं है। इसके अलावा खुद अजित पवार के बेटे ने भी इस खबर को नकार दिया है। लेकिन स्थानीय मीडिया ने...
“कॉन्ग्रेस को महाराष्ट्र के मुद्दे पर दिक्कत हो रही है। इसीलिए उन्हें बार-बार सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ रहा है। लेकिन उनको शायद याद नहीं है कि राजस्थान में सहयोगी पार्टी होने के बावजूद बसपा के सभी विधायकों को उन्होंने तोड़ लिया था, तब उन्हें संविधान की याद नहीं आ रही थी।”