चिदंबरम को 21 अगस्त को सीबीआई ने गिरफ़्तार किया था। उनके बेटे कार्ति चिदंबरम ने कहा है कि राहुल और प्रियंका का उनके पिता से मुलाक़ात करने का मतलब है कि पूरी कॉन्ग्रेस पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
"पार्टी ने यूपी विधानसभा अध्यक्ष के सामने याचिका दाखिल कर रायबरेली सदर से विधायक अदिति सिंह की सदस्यता खत्म करने को लेकर याचिका भेजी है। उन्होंने सरकार द्वारा यूपी विधानसभा में 2 अक्टूबर को आयोजित विशेष सत्र का बहिष्कार करने के लिए पार्टी व्हिप का अनादर किया था।"
अमित शाह ने कहा कि जनादेश देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाने के लिए था, जिसका शिवसेना ने अपमान किया है। उन्होंने कहा कि अंत में स्थिर सरकार को ही जनता वापस लेकर आती है और महाराष्ट्र में भी ऐसा ही होगा।
राज्य सरकार ने इस वर्ष 31 अक्टूबर तक 11,000 करोड़ की शराब बेची है। नियमानुसार, ये पूरी की पूरी रक़म सरकारी खजाने में जमा होनी चाहिए थी। लेकिन, मात्र 8271 करोड़ 42 लाख रुपए ही सरकारी खजाने में जमा हुए।
जब अजित भाजपा के साथ चले गए थे तो सुप्रिया ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस में लिखा था कि पवार परिवार और पार्टी बॅंट गई है। उन्होंने लिखा था, “आप जीवन में किस पर भरोसा करोगे। इतना ठगा हुआ कभी महसूस नहीं हुआ। उनका बचाव किया, उन्हें प्यार दिया। देखो बदले में क्या मिला मुझे।”
फडणवीस के इस्तीफे को लेकर सोशल मीडिया में लोगों ने निराशा जताई। उनकी पत्नी अमृता फडणवीस ने इन पंक्तियों के माध्यम से अपने दिल की बात रखी है, "पलट के आऊँगी शाखों पे खुशबुएँ लेकर, खिज़ाँ की ज़द में हूँ मौसम ज़रा बदलने दे!"
थॉमस ने अपनी शिकायत में कहा है कि वायनाड और संसद से राहुल गाँधी की अनुपस्थिति ध्यान खींचती है। राहुल के लोकसभा क्षेत्र का नागरिक एवं वोटर होने के कारण वे सोशल मीडिया में उनके गायब होने की ख़बरों से चिंतित हैं।
बागी विधायक मुख्यमंत्री के गृह जिले के हैं। इन्हें कैप्टन के खेमे का भी माना जाता है। ऐसे में इनकी बगावत ने पार्टी की चिंताएं बढ़ा दी है। राज्य के अन्य हिस्सों और अन्य खेमों के विधायकों की नाराजगी को लेकर भी पार्टी सशंकित है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Republic Summit 2019 को सम्बोधित करते हुए न केवल अपनी सरकार के 5.5 सालों की उपलब्धियाँ गिनाईं बल्कि विरोधियों को भी करारा जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विरोधियों की चलती तो देश में जीएसटी कभी लागू ही न हो पाता।
"मैंने 21 साल तक बिना पद, प्रतिष्ठा या टिकट की माँग के रात-दिन पार्टी के लिए काम किया। लेकिन जब शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एनसीपी और कॉन्ग्रेस से हाथ मिला लिया है तो... ज़मीर इजाजत नहीं दे रहा है। आधे-अधूरे मन से कोई काम नहीं करना चाहता, इसलिए इस्तीफ़ा दे रहा हूँ।"