सतीश पूनिया को समझने में समय लगेगा। वे नए-नए मुल्ला हैं, जो नया मुल्ला होता है, वो जोर से बांग देता है। उनकी अभी वहीं स्थिती बनी है। उन्हें अमित शाह और नरेंद्र मोदी के इशारे मिले हैं।
मध्य प्रदेश स्थापना दिवस समारोह के लिए छपवाए गए ये कार्ड अतिथियों में बाँट दिए थे पर कॉन्ग्रेस के विरोध के बाद इन्हें वापस लिया गया और नए कार्ड बाँटे गए। नए कार्ड में कार्यक्रम की जानकारी और बाकी चीजें भी वही है, सिर्फ पंडित दीन दयाल उपाध्याय की तस्वीर को हटा दिया गया है।
“बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत है। इसके अलावा निर्दलीयों का समर्थन भी है, गठबंधन ने 288 में से 161 सीटें जीतकर जनादेश हासिल किया है। हम इस जनादेश का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमें नहीं लगता कि एक स्थिर सरकार बनाने में कोई बाधा है।”
कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य में अल्पमत की सरकार बन सकती है, जिसे बाहर से एनसीपी समर्थन दे सकती है। जिस तरह से 2014 के चुनाव के बाद 288 सदस्यीय विधानसभा में जब 122 विधायकों वाली फड़नवीस की अल्पमत सरकार ने शपथ ली थी तो एनसीपी ने उसे बाहर से समर्थन दिया था।
छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेसी सरकार की ओर से पत्रकारिता क्षेत्र के लिए पंडित माधवराव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान दिया जाना है, जो एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर रवीश कुमार को दिया जाना तय किया गया है।
याद रहे कि 84 के उलट 48 में भी एक दंगा हुआ था, कॉन्ग्रेसियों ने ही कराया था। इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद जो हुआ, वो लगभग सबको याद है लेकिन 1948 को भी याद रखना जरूरी है, ताकि कॉन्ग्रेस के असली DNA को पहचाने सकें।
"बैंकों के फँसे कर्जों के संकट (एनपीए क्राइसिस) के बीज 2007-08 में पड़ गए थे। तब मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी की कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में यूपीए सरकार सत्ता में थी। इस काल खंड में बहुत सारे खराब कर्ज बाँटे गए, आज इनकी साफ़-सफाई होना विकास के लिए ज़रूरी है।"
"सरदार पटेल के आजादी में दिए योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। सरदार पटेल ने किसानों के लिए कई आंदोलन किए। जब अंग्रेजों को किसानों ने टैक्स देने से मना किया तो उनकी जमीनें छीन ली गई थीं, जिसे आजादी के बाद कॉन्ग्रेस सरकार ने वापस दिलवाया।"
श्री राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद दास कहते हैं कि सुरक्षा कारणों से करीब 19 वर्ष पहले ही पारदर्शी पन्नी में इलायचीदाना, मिश्री व मूंगफली प्रसाद के रूप में ले जाने की अनुमति दी गई थी। लेकिन बीते दो दिन से प्रसाद लेकर श्रद्धालु नहीं आ पा रहे हैं।
शिव सेना ने भी भाजपा की तर्ज पर अपने विधायक दल के नेता का चुनाव कर लिया है। एक बड़ा उलटफेर करते हुए इस पद पर एकनाथ शिंदे का चुनाव हुआ है, जबकि अधिकांश कयास यह पद आदित्य ठाकरे को मिलने के लग रहे थे।