कॉन्ग्रेस ने भीष्म शर्मा को नज़रअंदाज़ करते हुए शीला दीक्षित को उतार दिया। शीला और भीष्म में पुरानी प्रतिद्वंद्विता है और इसीलिए शीला ने प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार संभालते ही सबसे पहले भीष्म शर्मा पर गाज गिराई। उन्हें 6 वर्षों के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
कुछ दिनों से ख़बरें चलाई जा रही थीं कि उमा और प्रज्ञा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और दोनों के बयानों के ग़लत मतलब निकाले जा रहे थे लेकिन आज इन अटकलों पर विराम लग गया। भोपाल से सांसद रहीं उमा ने प्रज्ञा सिंह के पाँव छुए और उन्हें टिका लगाकर खीर भी खिलाई।
खबर दुर्गापुर के जेमुआ गाँव की है, जो आसानसोल संसदीय क्षेत्र में आता है। बीते मतदान चरणों में हुई हिंसा की खबरों को सुनते हुए गाँव वालों ने यह फैसला लिया है।
हंस राज हंस दलित वाल्मीकि समुदाय से आते हैं। इससे बिफरे उदित राज ने भाजपा छोड़कर कॉन्ग्रेस ज्वाइन कर लिया था। उदित राज टिकट की घोषणा में हुई देरी के बाद से ही पार्टी को धमकाने लगे थे लगातार विवादित बयानों के कारण पार्टी ने उनसे किनारा कर लिया।
नाराजगी की बड़ी वजह उनके बेटे को मीडिया का उतना अटेंशन नहीं मिलना है। मांड्या लोकसभा सीट से उनके बेटे निखिल गौड़ा को जद(एस) की टिकट पर निर्दलीय उम्मीदवार एवं बहुभाषी अभिनेत्री सुमालता अंबरीश के खिलाफ उतारा गया है।
वीडियो में देखा जा सकता है कि स्मृति ईरानी ख़ुद हैंडपंप चलाकर आग बुझाने में ग्रामीणों की मदद कर रही हैं। उन्होंने पीड़ित परिवारों व महिलाओं से मिलकर उन्हें सांत्वना भी दी। अधिकारियों के समय से मौके पर न पहुँचने के कारण स्मृति नाराज़ दिखीं।
अमर्त्य सेन को तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय का प्रथम कुलपति नियुक्त किया गया। उन्हें पाँच लाख रुपए प्रति महीने का वेतन दिया जाता था। बेहिसाब विदेशी दौरे, सीधी नियुक्तियाँ करने का अधिकार सहित उन्हें कई अन्य सुविधाओ से नवाजा गया था।
पीएम मोदी ने कहा था कि कश्मीर में एम्स और आईआईएम की स्थापना की गई, लेकिन अच्छे प्रोफेसर वहाँ जाने के लिए तैयार नहीं हैं, क्योंकि वो वहाँ पर कोई इनवेस्टमेंट नहीं कर सकते, संपत्ति नहीं खरीद सकते हैं।
दिग्विजय ने महात्मा गाँधी और कार्ल मार्क्स की तुलना करते हुए कहा कि दोनों में थोड़ा ही फ़र्क़ था। भारतीय कम्युनियस्ट पार्टी की भोपाल इकाई ने दिग्विजय सिंह का समर्थन करने की बात कही है।