तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का पद संभाल चुके पवार के इस ऐलान के बाद सियासी गलियारों में चर्चाएँ तेज़ हो गयी है। लोगों का कहना है कि राज्य में भाजपा-शिवसेना का गठबंधन होने और मोदी लहर के कारण उन्होंने आगामी चुनाव परिणाम भाँप लिया है।
अब राहुल गाँधी ने कुछ ऐसा किया है, जिसे जानकार आपके सामने उनके दिखावे की पोल तो खुल ही जाएगी, साथ ही यह भी पता चलेगा कि वे भारतीयता, हिंदुत्व और हमारी पूजा पद्धति से कितने अनभिज्ञ हैं।
पिछले साल जब कंप्यूटर बाबाजी को मार्च में शिवराज सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा दिया था, उस समय वह और योगेन्द्र महंतजी 15-दिवसीय नर्मदा स्कैम यात्रा निकालने की तैयारी कर रहे थे।
इन 15 सीटों पर पीएम से लेकर मंत्री और गाँधी सरनेम सब की होगी परीक्षा। बड़े नाम के कारण मीडिया करेगा बड़ा कवरेज। ऐसे में 2014 लोकसभा चुनाव में क्या हुआ था और 2019 में क्या हो सकता है, यह जानना जरूरी...
रमजान पर राजनीति हो रही है। चुनाव आयोग को घेरा जा रहा है। बीजेपी को फायदा दिलाने का आरोप आयोग पर लगाया जा चुका है। आम आदमी पार्टी से लेकर टीएमसी तक बिना वजह रमजान पर राजनीति कर रहे हैं। जो इस पर राजनीति कर रहे हैं उनका (कु)तर्क यह है कि...
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, पंजाब के अध्यक्ष सुनील जाखड़ और प्रभारी आशा कुमारी ने खुद पूर्व प्रधानमंत्री से क़रीब आधे घंटे तक मुलाकात की और आग्रह किया कि मनमोहन सिंह इस बार अमृतसर से चुनाव लड़ें।
भौगोलिक परिस्थितियाँ, जनसंख्या, सुरक्षा बलों के आवागमन, अशांत अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ व विभिन्न हिंसक संगठनों के कारण भारत में एक चरण में चुनाव संपन्न कराना संभव नहीं है। चुनावों के दौरान सुरक्षा बलों के जवान बस और ट्रेन से आवागमन करते हैं।
प्रशांत किशोर भले ही चुनावी रणनीति बनाने में सफल रहे हों, लेकिन राजनीति उनके लिए आसान नहीं। अभी हाल ही में आए उनके बयानों के बाद प्रशांत किशोर पार्टी में 'अकेले' पड़ते नजर आ रहे हैं।
जब-जब चुनावों का मौसम आता है, 'आदर्श आचार संहिता' चर्चा में आ जाती है। आज शाम 5 बजे आम चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही देश में आचार संहिता लागू हो जाएगी। यहाँ जानिए क्या है ये और क्या होंगे इसके प्रभाव। साथ ही जानें इसका इतिहास।
देश के किसी भी विश्वविद्यालय में किसी भी आमूल चूल बदलाव को फासीवाद का नाम देने वाले कांग्रेस और वामदलों ने एफटीआईआई के पूर्व चेयरमैन गजेंद्र सिंह चौहान का विरोध इतने निचले स्तर पर आकर किया था कि आखिरकार उन्हें इस्तीफा देना पड़ गया।